उत्तर प्रदेश

आधार कार्ड की एक भूल ने छीनी पहचान: ‘महिला’ से ‘पुरुष’ बनी फातमा को 8 साल से न्याय का इंतजार

उत्तर प्रदेश के शामली जिले (गांव बलवा) की रहने वाली 24 वर्षीय फातमा पिछले आठ वर्षों से सरकारी तंत्र की एक छोटी सी लापरवाही का बड़ा खामियाजा भुगत रही हैं। ऑपरेटर की चूक के कारण उनके आधार कार्ड में लिंग (Gender) के कॉलम में ‘महिला’ के बजाय ‘पुरुष’ दर्ज हो गया। इस एक गलती ने उनके जीवन और करियर में कई बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं और वे अपनी वास्तविक पहचान साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

कैसे शुरू हुई यह परेशानी?

10 जनवरी 2015 को फातमा ने अपने आधार कार्ड में जन्म तिथि सुधारने के लिए आवेदन किया था। जन्म तिथि तो सही कर दी गई, लेकिन उसी दौरान ऑपरेटर ने गलती से जेंडर कॉलम में ‘पुरुष’ अंकित कर दिया। शुरुआत में इस पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन करीब तीन साल बाद जब फातमा को किसी जरूरी काम के लिए आधार की आवश्यकता पड़ी, तब जाकर इस बड़ी तकनीकी चूक का खुलासा हुआ।

फातमा के 8 साल के संघर्ष का घटनाक्रम

वर्षफातमा के प्रयास और परिणाम
2015पहली बार जन्म तिथि में सुधार, ऑपरेटर द्वारा जेंडर में ‘पुरुष’ दर्ज।
2018फातमा ने दोबारा संशोधन का आवेदन किया, लेकिन ‘एक बार संशोधन की लिमिट’ का हवाला देकर मना किया गया।
2022बैंक ऑफ बड़ौदा की आधार हेल्प डेस्क पर गईं, वहां भी ‘लिमिट समाप्त’ बताकर लौटा दिया गया।
मार्च 2026सुधार का एक और प्रयास किया, पैसे खर्च किए लेकिन काम नहीं हुआ।
जून 2026सहारनपुर जोनल ऑफिस से लेकर दिल्ली (अक्षरधाम) स्थित आधार मुख्यालय तक गुहार लगाई, पर समाधान शून्य रहा।

करियर और भविष्य पर पड़ा सीधा असर

पहचान के इस संकट के कारण फातमा का केवल समय ही बर्बाद नहीं हुआ, बल्कि उनके भविष्य पर भी गंभीर असर पड़ा है:

  • बैंक खाता नहीं खुला: केवाईसी (KYC) मिसमैच के कारण वह अपना बैंक अकाउंट नहीं खुलवा सकीं।
  • छात्रवृत्ति से वंचिंत: हाल ही में आईटीआई (ITI) और मार्केटिंग में डिप्लोमा पास करने के बावजूद, आधार कार्ड की गलती के कारण उन्हें मिलने वाली स्कॉलरशिप रोक दी गई।
  • रोजगार में बाधा: दस्तावेजों में जेंडर अलग होने के कारण नौकरी के अवसरों पर भी लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

अब क्या है समाधान का रास्ता?

लंबे भटकाव के बाद, जिला आधार मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि अब यह संशोधन केवल मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा प्रमाणित मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही संभव है।

गुरुवार को फातमा ने सीएमओ से मुलाकात की, जिसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए शामली सीएचसी (CHC) भेजा गया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ने शनिवार को फातमा को उनके माता-पिता के साथ बुलाया है। वहां मेडिकल बोर्ड द्वारा आधिकारिक रूप से यह पुष्टि की जाएगी कि वह एक महिला हैं, और उसी रिपोर्ट के आधार पर अंततः आधार कार्ड में संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

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