
उत्तर प्रदेश की राजनीति के चर्चित चेहरे और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां तथा उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम से जुड़े मामलों पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। अब्दुल्लाह आजम के दो पैन कार्ड (PAN card) रखने से जुड़े चर्चित मामले के साथ-साथ पिता-पुत्र दोनों की ओर से दायर की गई अलग-अलग आपराधिक पुनरीक्षण (Criminal Revision) याचिकाओं पर कोर्ट अपना रुख साफ कर सकता है। इन याचिकाओं में रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती दी गई है और उस पर रोक लगाने की मांग की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी दांव-पेंच
रामपुर की स्थानीय एमपी/एमएलए अदालत ने अब्दुल्लाह आजम को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और दस्तावेजों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाने और उपयोग करने के मामले में 7 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, अन्य मामलों में आजम खां को भी अदालत से 10 साल तक की सजा मिल चुकी है। निचली अदालत के इन फैसलों के खिलाफ राहत पाने और सजा पर रोक (stay on conviction) लगवाने के उद्देश्य से पिता-पुत्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अलग-अलग क्रिमिनल रिवीजन याचिकाएं दाखिल की हैं।
कानूनी जानकारों के अनुसार, आज हाईकोर्ट में होने वाली इस सुनवाई पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं। अदालत के रुख और फैसले से यह तय होगा कि दोनों नेताओं को कानूनी मोर्चे पर कोई राहत मिलती है या नहीं। आगामी राजनीतिक और कानूनी भविष्य के लिहाज से उच्च न्यायालय का यह निर्णय बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।




