
उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में कारोबारी अमित कुमार की ईंट-पत्थर से निर्मम हत्या करने वाले 58 गंभीर मामलों के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर संजय सिंह चौहान उर्फ संजय ढाबा को पुलिस ने रविवार शाम एक मुठभेड़ के दौरान धर दबोचा। पनकी-सचेंडी बॉर्डर पर हुई इस पुलिस मुठभेड़ के दौरान जवाबी कार्रवाई में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है, जिससे वह घायल हो गया। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ही शहर में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल था, जिसे देखते हुए पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी।
वारदात का पूरा घटनाक्रम
नवीननगर पुरानी बस्ती के रहने वाले कारोबारी अमित कुमार (5 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे) अपनी सुधा मार्केट के बाहर पानी पी रहे थे। उसी दौरान काकादेव के ओम चौराहे पर शास्त्रीनगर का पेशेवर अपराधी और नवाबगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर हितेंद्र श्रीवास्तव उर्फ मोनू नेता, कुशल श्रीवास्तव, संजय सिंह ढाबा और अश्विनी यादव शराब के नशे में धुत होकर गाली-गलौज कर रहे थे।
आरोपियों में से एक हिस्ट्रीशीटर जब चौराहे के बीचोंबीच खुलेआम पेशाब करने लगा, तो अमित कुमार ने इसका कड़ा विरोध किया। विरोध करने से गुस्साए आरोपियों ने आव देखा न ताव, अमित को घसीटते हुए बुरी तरह पीटा और सड़क पर पड़े ईंट-पत्थरों से उनका सिर बेरहमी से कूंच डाला। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां अगले दिन इलाज के दौरान उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात के विरोध में मृतक की पत्नी शिवानी और उनके बेटों (रुद्र प्रताप व अर्पित) समेत सैकड़ों स्थानीय लोगों ने कैंडल मार्च निकाला था और तीन दिन के भीतर सभी आरोपियों को गिरफ्तार न करने पर बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी थी।
पुलिस मुठभेड़ और आपराधिक इतिहास
घटना के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस टीमें लगातार सर्विलांस और अन्य तकनीकी माध्यमों से जुटी हुई थीं। रविवार शाम पुलिस को संजय ढाबा की लोकेशन पनकी-सचेंडी बॉर्डर के पास मिली, जिसके बाद पुलिस ने उसे घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस दल पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में संजय ढाबा के दोनों पैरों में गोली जा लगी, जिससे वह मौके पर ही ढेर हो गया। पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लेकर इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, संजय ढाबा कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि उस पर कानपुर के विभिन्न थानों (गुजैनी, कल्याणपुर, फजलगंज, नवाबगंज, काकादेव, बिठूर, कोतवाली, पनकी और स्वरूपनगर) में कुल 58 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसका काला कारोबार केवल हत्या तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अवैध पिस्टलों की तस्करी करने के साथ-साथ बिठूर, उन्नाव, शुक्लागंज और जाजमऊ जैसे इलाकों में अवैध सट्टा और जुए की बुक भी चलवाता था। इससे पहले भी उसका दो बार ‘हाफ एनकाउंटर’ हो चुका है।
अवनीश दीक्षित का आया नाम, वीडियो वायरल करने की थी साजिश
पुलिस पूछताछ के दौरान कुख्यात संजय ढाबा ने एक बड़ा खुलासा किया है। उसने बताया कि गिरफ्तारी से बचने और पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने गैंगस्टर के आरोपी अवनीश दीक्षित की सलाह पर एक वीडियो शूट किया था। इस वीडियो में उसने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए सोशल मीडिया पर वायरल किया था। आरोपी के अनुसार, अवनीश दीक्षित ने उसे यह भरोसा दिलाया था कि ऐसा करने से उसे कानूनी मामलों में सुरक्षा और मदद मिलेगी।
इस खुलासे के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीरलाल ने स्पष्ट किया है कि विवेचना के दौरान इस मामले में कथित पत्रकार या अन्य मददगारों की संलिप्तता की भी जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर उनका नाम भी मुकदमे में बढ़ाया जाएगा। पुलिस इस हत्याकांड में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार ताबड़तोड़ दबिश दे रही है।



