
भारत सरकार ने निजी तौर पर ऐपल, सैमसंग और अन्य स्मार्टफोन कंपनियों से अनुरोध किया है कि वे सभी नए फोन में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल करें। हालांकि, इन कंपनियों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। यह मामला कुछ हफ्ते पहले संचार साथी ऐप को लेकर हुई बहस के ठीक बाद सामने आया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में UIDAI (आधार प्रोग्राम की नोडल एजेंसी) ने आईटी मंत्रालय के जरिए फोन मेकर्स से यह बात रखी। आधार ऐप से यूजर्स अपनी डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं, फैमिली प्रोफाइल मैनेज कर सकते हैं और बायोमेट्रिक लॉक लगा सकते हैं। सरकार का तर्क है कि पहले से इंस्टॉल होने से आम नागरिकों को ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पहुंच आसान होगी।
कंपनियों का विरोध
मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MAIT) ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। ऐपल और सैमसंग ने खास तौर पर सुरक्षा, प्राइवेसी और डेटा मिसयूज के जोखिम की बात कही। MAIT ने 13 जनवरी के एक आंतरिक ईमेल में कहा कि यह कदम “जनहित में ज्यादा फायदा नहीं देगा”। साथ ही, भारत के लिए अलग प्रोडक्शन लाइन बनानी पड़ेगी, जो निर्यात बाजार के लिए दिक्कत पैदा करेगी।
आधार ऐप का महत्व
आधार भारत का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम है, जिसमें 1.34 अरब से ज्यादा लोग नामांकित हैं। यह बैंकिंग, टेलीकॉम, एयरपोर्ट और कई सरकारी सेवाओं में इस्तेमाल होता है। नए ऐप में बायोमेट्रिक लॉक जैसी सुविधाएं हैं, लेकिन पिछले डेटा लीक की घटनाओं के कारण प्राइवेसी चिंताएं बनी हुई हैं।
संचार साथी से तुलना
संचार साथी ऐप के मामले में सरकार ने फोन में पहले से इंस्टॉल करने का सख्त निर्देश देने की कोशिश की थी, जिसमें ओटीए अपडेट से पुराने फोन में भी ऐप डालने की बात थी और यूजर इसे डिसेबल नहीं कर पाते थे। आधार के मामले में यह अनुरोध ज्यादा नरम था, लेकिन कंपनियां फिर भी नहीं मानीं।
और ऐप्स भी लाइन में?
रिपोर्ट के अनुसार, आधार ऐप सहित कुल छह सरकारी ऐप्स को पहले से इंस्टॉल करने का प्रस्ताव था। इनमें आपदा अलर्ट सर्विस ‘सचेत’ भी शामिल है, जिसके खिलाफ MAIT ने 10 मार्च 2026 को आईटी मंत्रालय को पत्र लिखा। कंपनियां कहती हैं कि रूस के अलावा किसी लोकतांत्रिक देश में सरकारी ऐप्स को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल नहीं किया जाता।



