किन्नरों को हो जाता है मौत का पूर्वाभास, जानिए उनसे जुड़ी कुछ अनोखी बातें

मुंबई। भारत में किन्नरों का इतिहास चार हज़ार साल से भी पुराना है, इसके बावजूद आजतक उन्हें सोसाइटी में बराबरी का दर्ज़ा नहीं मिल पाया है। हम वास्ताव में उनसे जुड़ी पहलूवों को ही नहीं जान पाए हैं जो सीधी उनकी जिंदगी से जुड़े हैं।

जैसी उनकी परम्पराएं हिन्दू धर्म की होती है लेकिन उनके गुरु मुस्लिम होते है। देखा जाए तो भारत में रहने वाली ज्यादातर किनारों की परम्पराएं हिन्दू धर्म के मुताबिक निभाई जाती है, लेकिन बात जब किन्नर गुरु की आती है तो वो मुस्लिम होते है। ऐसे तमाम अनजाने पहलू है जिनकी जानकारी बहुत कम लोगों को होगी।

आपको ये नहीं पता होगा कि नए किन्नरों का स्वागत उनकी टोली में एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। ये बात तो आप जानते ही नहीं होंगे की किन्नरों की शादी भी होती है। ये अनोखी शादी साल में सिर्फ एक दिन होती है।

उनकी शादी भगवान से होती है, किन्नरों के भगवान अरावन से किन्नरों की शादी कराई जाती है वो भी यह शादी सिर्फ एक दिन के लिए मान्य होती है।

देखने से तो किन्नर बहुत खुशमिजाज नजर आते है मगर असल में किन्नर ये कभी नहीं चाहते की अगले जन्म में भी उन्हें किन्नर का रूप मिले इसलिए वों बरुचा माता की पूजा कर उनसे माफ़ी भी मांगते है।

हर किन्नर का अपना एक गुरु जरूर होता है जिन्हें अपनी शिष्य के बारे में जानकारी होती है। कहते है उन्हें यहां तक पता होता है कि उनकी शिष्य की मौत कब होगी। इस बात में कितनी सच्चाई है कुछ कहा नहीं जा सकता।

शिष्य की मौत का राज उस गुरु को ही पता होगा जिसका जन्म खुद किन्नर की तरह हुआ हो। इतिहास गवाह है है कि हज़र्रों सालों से किन्नरों को अनदेखा किया जाता है लेकिन इतिहास में ही दर्ज किनारों के गोल्डन एरा के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होंगी।

दरसल मुग़ल साम्राज्य में किन्नरों को सबसे पहले अहमियत दी गई। महिलाओं के हरम के रक्षा के लिए ही सही उन्हें इस योग्य तो समझा गया की वो भी सामाज का ही अहम हिसा है।

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इसके लिए तर्क यह भी दिया जात है कि किन्नर शारीरिक रूप से मर्द जितने ही बलवान होते है इसीलिए उन्हें मुग़ल सामराज्य की महिलाओं की सुरक्षा के लिए रखा जाता था। मुग़ल सेना न सिर्फ रानियों को सुरक्षा के लिए बल्कि कईयों को अपनी सेना में जनरल बनाया था। सबसे पहले मुग़लों ने ही किन्नरों को इतना सम्मान दिया था।

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