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बंद होंगे 2000 के नोट, 16 साल की मेहनत पर पीएम मोदी ने फेरा पानी!

2000 के नोटनई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500-1000 रुपए नोटबंदी का फैसला लिया। नए 500-2000 के नोट निकाले। तर्क दिया कि इससे आतंकवाद और कालेधन पर लगाम कसी जा सकेगी। लेकिन जिस शख्‍स ने उन्हें नोटबंंदी का आइडिया दिया, अब उसने ही मोदी सरकार पर बड़ा आरोप मढ़ा है।

पुणे निवासी अनिल बोकिल और उनके थिंक टैंक अर्थक्रांति प्रतिष्ठान की ओर से कहा गया है कि मोदी सरकार ने उनके पूरेे आइडिया का इस्तेमाल नहीं किया। बोकिल के मुताबिक उनकी टीम 16 साल तक इस आइडिया पर मेहनत की। कड़ी मशक्कत के बाद पांच बड़े प्वाइंट्स को आधार बनाकर प्लान बनाया। लेकिन मोदी सरकार ने इनमें से सिर्फ 2 प्वाइंट्स पर अमल किया।

एक इंटरव्यूू में बोकिल ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली जा रहे हैं। हालांकि देर शाम तक पीएमओ की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि पीएम अब बोकिल को मिलने का वक्त नहीं देना चाहते हैं।

जुलाई महीने में बोकिल को मोदी से मिलने के लिए महज नौ मिनट का वक्त मिला था। लेकिन जब मोदी ने बोकिल को सुना तो दोनों के बीच बातचीत दो घंटों तक खिंच गई। इस बातचीत का परिणाम नोटबंदी के रूप में सामने आया।

बोकिल के सुझाव

1. केंद्र या राज्य सरकारों के साथ-साथ स्थानीय निकायों द्वारा वसूले जाने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सभी करों का पूर्ण खात्मा किया जाए।

2. कैश ट्रांजैक्शन (निकासियों) पर कोई टैक्स नहीं लिया जाए।

3. सभी तरह की ऊंचे मूल्य की करंसी (50 रुपये से ज्यादा की मुद्रा) वापस लिए जाएं।

4. सरकार निकासी की सीमा 2,000 रुपये तक किए जाने के लिए कानूनी प्रावधान बनाए।

5. ये टैक्सेज बैंक ट्रांजैक्शन टैक्स (बीटीटी) में तब्दील किए जाने थे, जिसके अंतर्गत बैंक के अंदर सभी प्रकार के लेनदेन पर लेवी (2 प्रतिशत के करीब) लागू होती। यह प्रक्रिया सोर्स पर सिंगल पॉइंट टैक्स लगाने की होती। इससे जो पैसे मिलते उसे सरकार के खाते में विभिन्न स्तर (केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय आदि के लिए क्रमशः 0.7%, 0.6%, 0.35% के हिसाब से) पर बांट दिया जाता। इसमें संबंधित बैंक को भी 0.35% हिस्सा मिलता। हालांकि, बीटीटी रेट तय करने का हक वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास होता।

2000 के नोट का विरोध

बोकिल ने कहा कि इन सारे प्रस्तावों को मान लिया जाता तो बैंकों पर लम्बी लाइन नहीं लगती। आम अादमी को कम परेशानी होती। लेकिन मोदी सरकार ने आधी-अधूरी तैयारी ने सारा प्लान बिगाड़ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने 2,000 रुपये के नोट ला दिए, जिसे हम वापस लेने का प्रस्ताव रख रहे हैं।

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