सीबीआई ने दाखिल की जिंदल कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले की क्लोजर रिपोर्ट

navin-jindal_landscape_1459591058यूपीए सरकार में हुए कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड (जेएसपीएल) के खिलाफ चल रही सीबीआई की प्रारंभिक जांच बंद हो गई है। इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका की जांच की भी मांग उठती रही है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सीबीआई और मुख्य सतर्कता आयुक्त कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने प्रारंभिक जांच की क्लोजर रिपोर्ट अलग-अलग पेश की। यूपीए सरकार में हुए इस घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के अगुवाई में हो रही है।

बताया जाता है कि यह मामला रामचंदी कोयले के ब्लॉक से जुड़ा हुआ है जिसे जेएसपीएल को दिया गया था। 28 फरवरी 2009 में लागू हुआ आदर्श चुनाव आचार संहिता के लागू होने से पहले यह कंपनी जिंदल के नाम पर ही थी।

 
इस मामले की जांच की बात उस वक्त उठी जब जिंदल की कंपनी के नाम पर आवंटित पश्चिमी राधिकापुर के कोयले के ब्लॉक के अलावा उन्हें रामचंदी कोल ब्लॉक भी दे दिया गया। प्रारंभिक जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि जिंदल की कंपनी को अतिरिक्त कोल ब्लॉक का आवंटन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुख्य सचिव टीकेए नायर ने किया था और इस मुद्दे पर जिस वक्त फैसला किया गया उस वक्त मनमोहन सिंह एम्स में भर्ती थे।

जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ था कि रामचंदी कोल ब्लॉक के लिए निर्धारित नीलामी राशि 4,000 करोड़ थी लेकिन जेएसपीएल ने इसके लिए महज 3,722 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया था।

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सीबीआई कोल आवंटन जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा नहीं कर सकती।’ बताया जाता है कि आवंटन घोटाले की प्रारंभिक जांच में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का फैसला दिसंबर 2015 में ही ले लिया गया था लेकिन इसे मार्च में दाखिल किया गया।

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