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शरीर को बांधकर रखता है सांस का धागा

सांस वो धागा है, जो आपको शरीर से बांध कर रखता है। अगर मैं आपकी सांसें ले लूं तो आपका शरीर छूट जाएगा। यह सांस ही है, जिसने आपको शरीर से बांध रखा है। जिसे आप अपना शरीर और जिसे ‘मैं’ कहते हैं, वे दोनों आपस में सांस से ही बंधे हैं। यह सांस ही आपके कई रूपों को तय करती है। जब आप विचारों और भावनाओं के विभिन्न स्तरों से गुजरते हैं, तो आप अलग-अलग तरह से सांस लेते हैं। आप शांत हैं तो एक तरह से सांस लेते हैं।

सांस

आप खुश हैं, आप दूसरी तरह से सांस लेते हैं। आप दु:खी हैं, तो आप अलग तरह से सांस लेते हैं। यह ऊर्जा या प्राण, शरीर में खास तरीके से चलता है, यह मनमाने ढंग से नहीं चलता। इसके चलने के 72,000 विभिन्न ढंग हैं। दूसरे शब्दों में, हमारी प्रणाली में 72,000 रास्ते हैं जिनसे यह चलता है। इन रास्तों को नाड़ियां कहते हैं। क्या आपने यह महसूस किया है? इसके ठीक उल्टा है प्राणायाम और क्रिया का विज्ञान।

जिसमें एक खास तरह से, सचेतन सांस लेकर अपने सोचने, महसूस करने, समझने और जीवन को अनुभव करने का ढंग बदला जा सकता है। शरीर और मन के साथ कुछ दूसरे काम करने के लिए इन सांसों को एक यंत्र के रूप में कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। आप देखेंगे कि ईशा क्रिया में हम सांस लेने की एक साधारण प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहें हैं, पर क्रिया सिर्फ सांस में नहीं है। सांस सिर्फ एक उपकरण है। सांस तो एक शुरूआत है, पर जो होता है वह अद्भुत है।

आप जिस तरह से सांस लेते हैं, उसी तरह से आप सोचते हैं। आप जिस तरह से सोचते हैं, उसी तरह से आप सांस लेते हैं। आपका पूरा जीवन, आपका पूरा अचेतन मन आपकी सांसों में लिखा हुआ है। अगर आप सिर्फ अपनी सांसों को पढ़ें, आपका अतीत, वर्तमान और भविष्य आपकी सांस लेने की शैली में लिखा हुआ है।एक बार जब आप इसे जान जाते हैं, जीवन बहुत अलग हो जाता है। इसे अनुभव करना होता है, यह ऐसा नहीं है जिसे आप प्रवचन से सीख सकते हैं।

अगर आप बस यहां बैठने का आनंद जानते हैं, यानी कुछ सोचे बिना, कुछ किए बिना, बस बैठने का आनंद जानते हैं, सहज एक जीवन के रूप में बैठना, तब जीवन बहुत अलग हो जाता है।यह असल में क्या है, आज इसका वैज्ञानिक सबूत है कि बिना शराब की एक बूंद लिए, बिना कोई चीज लिए, आप यहां सहज बैठकर, अपने आप नशे में मतवाले व मदहोश हो सकते हैं।

अगर आप एक खास तरह से जागरूक हैं, तो आप अपनी आंतरिक प्रणाली को इस तरह से चला सकते हैं कि आप सिर्फ यहां बैठने मात्र से परमानंद में चले जाते हैं। एक बार जब केवल बैठना और सांस लेना इतना बड़ा आनंद बन जाए, आप बहुत हंसमुख, विनम्र और अद्भुत हो जाते हैं, क्योंकि तब आप अपने अंदर एक ऊंची अवस्था में होते हैं। दिमाग पहले से ज्यादा तेज हो जाता है।

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