नीति आयोग-“विदेशी यूनीवर्सिटी को भारत में परिसर खोलने की अनुमति मिले”

l_NITI-Aayoga-1460779980एजेंसी/ नई दिल्ली।

नीति आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मानव संसाधन मंत्रालय को सौंपी एक रिपोर्ट में विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने का सुझाव दिया है। उल्लेखनीय है कि यह प्रस्ताव यूपीए का कार्यकाल का है जिसका उस समय भाजपा ने विरोध किया था। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने की अनुमति देने से देश में उच्च शिक्षा की बढ़ती मांग, बढ़ती प्रतियोगिता की चुनौतियों से निपटने और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

उल्लेखनीय है कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशी यूनीवर्सिटी के परिसर से सबंधित सभी रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए नीति आयोग से कहा था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि नीति आयोग उन कारणों का भी पता लगाए कि इस मुद्दे पर आगे क्यों नहीं बढ़ा जा सका। 

नई शिक्षा नीति के लिए भी विचार का बिन्दु

उन्होंने जून 2015 में विदेश के शीर्षस्थ संस्थानों को प्रोत्साहित करने की व्यवहार्यता पर विचार करने के लिए वरिष्ठ नौकरशाहों की बैठक भी बुलाई थी। यह मुद्दा नई शिक्षा नीति के लिए भी विचार का बिन्दु रहा है। नई शिक्षा नीति का खुलासा इस साल किया जाएगा। संयोगवश इस प्रस्ताव को हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और जमू-कश्मीर समेत दस राज्य सरकारों का समर्थन मिला हुआ है जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है। 

पहले भी की जा चुकी है कोशिश

पहले भी केन्द्र सरकार विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश की कवायद कर चुकी है। 1995 में पहली बार विधेयक लाया गया था जो आगे नहीं बढ़ सका था। 2005-06 में भी यह कैबिनेट से आगे नहीं बढ़ सका था। वर्ष 2010 में यूपीए-2 के कार्यकाल में फॉरेन एजूकेशनल इंस्टीट्यूशन्स बिल लाकर आखिरी बार कोशिश की गई थी पर यह भाजपा, वाम और समाजवादी पार्टी के विरोध के चलते पारित नहीं हो सका था।

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