ये अशुभ योग, इनमें श्रेष्ठ कार्य हैं वर्जित

amavasya-55a649efe29db_lएजेन्सी/7 अप्रेल 2016 को गुरुवार है। इस दिन शुभ वि.सं.: 2072, संवत्सर नाम: कीलक, अयन: उत्तर, शाके: 1938, हिजरी: 1437, मु.मास: जमादि-उलसानि-28, ऋतु: बसन्त, मास: चैत्र, पक्ष: कृष्ण है।

शुभ तिथि

अमावस्या तिथि सायं 4.54 तक, तदुपरान्त चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा प्रारम्भ हो जाएगी। चान्द्र संवत्सर 2072 विक्रमी समाप्त हो जाएगा। अमावस्या तिथि में अग्निहोत्र, स्नान, दान, पितृकर्म तथा यज्ञादि कार्य करने चाहिए। 

अमावस्या व शुक्ल प्रतिपदा में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं। अमावस्या तिथि में जन्मा जातक सामान्यत: विद्या व बुद्धि में कुछ कम, अस्पष्ट वक्ता, व्याकुल चित्त, प्रमादी, पर सुखी सुंदर व भाग्यशाली होता है।

नक्षत्र

रेवती नक्षत्र अर्द्धरात्रि के  बाद 2.22 तक, तदुपरान्त अश्विनी नक्षत्र रहेगा। रेवती नक्षत्र में यद्यपि घर, देव मन्दिर, अलंकार, विवाह, जनेऊ व जल सम्बन्धी कार्य शुभ होते हैं। पर गुरुवार को तिथि शुभ नहीं है। 

इसलिए उक्त वर्णित शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते। रेवती व अश्विनी दोनों ही गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र हैं। अत: इन नक्षत्रों में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण के लिए आगे 27 दिन बाद जब इन नक्षत्रों की पुनरावृत्ति हो, उस दिन नक्षत्र शान्ति करा देना जातकों के हित में होगा। 

रेवती नक्षत्र में जन्मा जातक माता-पिता की सेवा करने वाला, चाल व वाणी से तेज, बुद्धिमान, साधु प्रकृति वाला, मेधावी, साहसी, सर्वप्रिय और विद्वान होता है। इनके 17, 21 व 24वें वर्ष प्राय: अच्छे नहीं रहते।

योग

ऐंद्र नामक योग अपराह्न 2.57 तक, तदन्तर वैधृति नामक योग रहेगा। दोनों ही नैसर्गिक अशुभ योग हैं। वैधृति योग में समस्त शुभ व मांगलिक कार्य सर्वथा वर्जित हैं।

विशिष्ट योग

सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से सम्पूर्ण दिवारात्रि है।

करण

चतुष्पद नामक योग प्रात: 6.47 तक, तदन्तर नागादि करण रहेंगे। सभी स्थिर संज्ञक करण हैं। जिनमें पितृकार्यादि करने चाहिए।

चंद्रमा

अर्द्धरात्रि के बाद 2.22 तक मीन राशि में, इसके बाद मेष राशि में रहेगा।

व्रतोत्सव 

गुरुवार को चैत्री अमावस्या, देवपितृकार्य अमावस्या, मन्वादि, पंचक समाप्त रात्रि 2.22 के बाद, चान्द्र संवत्सर 2072 विक्रमी समाप्त तथा विश्व स्वास्थ्य दिवस है।

शुभ मुहूर्त

उक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार गुरुवार को किसी शुभ व मंगल कृत्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं हैं।

वारकृत्य कार्य

गुरुवार को सामान्यत: सभी धार्मिक कार्य, पूजा, पाठ, प्रतिष्ठा, नवग्रह पूजन, विद्यारम्भ, यज्ञ, हवन, नवीन वस्त्राभूषण धारण, वाहन घर में लाना, औषध संग्रह व प्रयोग आदि कार्य प्रशस्त हैं।

दिशाशूल

गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। अति आवश्यकता में कुछ दही खाकर शूल दिशा की अनिवार्य यात्रा पर प्रस्थान कर लेना चाहिए। चंद्र स्थिति के अनुसार कल उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभ रहेगी।

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