माली को स्वर्ण खनन व कृषि में भारतीय निवेश का इंतजार

मालीअकरा| माली में अन्य क्षेत्रों के साथ स्वर्ण खनन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भारतीय उद्यमियों और निवेशकों के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। राजधानी बामको में भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी है।

दूतावास ने साथ एक ईमेल संवाद में कहा, “माली अफ्रीका का तीसरा प्रमुख स्वर्ण उत्पादक देश (दक्षिण अफ्रीका और घाना के बाद) है और इसका अनुमानित रिजर्व 600-800 टन है। दोनों देशों के बीच स्वर्ण उत्पादन और आभूषण निर्माण के क्षेत्र में विपणन के लिए संयुक्त उद्यम स्थापित करने की काफी संभावनाएं हैं।”

पश्चिम अफ्रीकी देश माली वर्तमान में प्रति वर्ष 60 टन सोने का उत्पादन करता है।

दूतावास ने कहा, “भारतीय व्यवसायियों के लिए माली में निवेश का बड़ा दायरा है। विशेष रूप से कृषि (कपास, खाद्य प्रसंस्करण, टैनरीज), खनन (सोना, लौह अयस्क, फास्फेट, यूरेनियम, बॉक्साइट, जस्ता, मैंगनीज, टिन और तांबा), ऑटोमोबाइल (दोपहिया खंड) और फार्मास्यूटिकल्स (जेनेरिक ड्रग्स) के क्षेत्र में निवेश की काफी संभावनाएं हैं।”

माली की आबादी लगभग 1.5 करोड़ है। यहां के लोग उष्णकटिबंधीय बीमारियों के संपर्क में आते हैं, जिससे यहां भारतीय जेनेरिक दवाओं और दवा उत्पादों के लिए एक अच्छा बाजार भी है।

भारतीय दूतावास ने कहा, “इस क्षेत्र में हमारी क्षमताओं और प्रतिस्पर्धा के बारे में पहले से ही एक जागरूकता है, जिसका भारतीय कंपनियां वाणिज्यिक अनुबंध के रूप में लाभ ले सकती हैं।”

दूतावास ने कहा, “माली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर आधारित है, जिसकी देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी है।”

बतया गया, “अफ्रीका में मिस्र के बाद माली दूसरा सबसे बड़ा कपास का उत्पादक है।”

कहा जाता है कि इस देश में अफ्रीका में सबसे ज्यादा आमों का उत्पादन होता है, लेकिन यहां प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव है।

दूतावास ने कहा कि माली की सरकार अपने खनिज संसाधनों के अन्वेषण और दोहन की उत्सुक है और औपचारिक रूप से भारत सरकार या सरकार द्वारा नामित कंपनियों को पट्टे पर अधिकार देने की पेशकश की है।

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