‘महाराष्ट्र में गठबंधन से सरकार न बनाकर भाजपा राज्य को राष्ट्रपति शासन की ओर लेकर जा रही’

मुंबईः महाराष्ट्र में चुनावों के परिणाम में भाजपा के बाद दूसरे पायदान पर शिवसेना रही लेकिन दोनों ही पार्टियां गठबंधन की सरकार को लेकर एक दूसरे सामने शर्त रख रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उनके पास बहुमत हासिल करने की क्षमता है जिससे उनकी पार्टी पूरे पांच साल सत्ता में रहेगी लेकिन शिवसेना का कहना है कि दोनों ही पार्टियों को 2.5-2.5 साल तक सत्ता में काबिज करने का मौक मिले।

इस वजह से महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया जिसको लेकर राकांपा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा राज्य को राष्ट्रपति शासन की दिशा में ले जा रही है और इस राज्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जरिए चलाना चाहती है।

राकांपा के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की जनता राज्य के इस ‘अपमान’ को बर्दाश्त नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि राज्य ने कभी भी ‘दिल्ली के तख्त’ के आगे घुटने नहीं टेके।

राज्य में विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को हुए थे और परिणाम की घोषणा 24 अक्टूबर को हुई थी।

इसमें भाजपा 105 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली थी।

इन दोनों में से किसी भी दल ने एक साथ या अलग-अलग सरकार गठन का दावा पेश नहीं किया है।

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मलिक ने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा महाराष्ट्र को दिल्ली से मोदी और शाह के जरिए चलाना चाहती है, इसीलिए वह राज्य को राष्ट्रपति शासन लगाने की दिशा में ले जा रही है। लोग महाराष्ट्र का यह अपमान सहन नहीं करेंगे।’’

चुनाव में राकांपा को 54 सीटें और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी। सरकार गठन के लिए बहुमत का आंकड़ा 145 है।

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