वेनेजुएला संकट: अमेरिकी कार्रवाई पर भारत की गहरी चिंता, की संवाद से समाधान की अपील

वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। 3 जनवरी 2026 को हुए इस हमले में अमेरिकी सेना ने काराकास पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए और मादुरो दंपति को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगे हैं।

भारत की प्रतिक्रिया: चिंता और संयम की अपील
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटनाक्रम पर “गहरी चिंता” जताई है। बयान में कहा गया कि भारत स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा व भलाई के प्रति प्रतिबद्ध है। सभी पक्षों से अपील की गई कि मौजूदा मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से संवाद के माध्यम से किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनी रहे। किसी भी प्रकार की हिंसा से हालात और बिगड़ सकते हैं।

ट्रैवल एडवाइजरी जारी
MEA ने भारतीय नागरिकों को वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। वहां मौजूद भारतीयों से अत्यधिक सतर्कता बरतने, आवाजाही सीमित रखने और काराकास स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क में रहने को कहा गया है।

चीन की कड़ी निंदा
चीन ने अमेरिकी कार्रवाई को “गंभीर रूप से स्तब्ध करने वाला” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। चीनी विदेश मंत्रालय ने इसे “हेगेमोनिक व्यवहार” करार देते हुए मादुरो दंपति की तत्काल रिहाई और व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। चीन ने कहा कि यह कदम वेनेजुएला की संप्रभुता का अतिक्रमण है और क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा करता है। सभी मुद्दों का समाधान कूटनीतिक वार्ता से होना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
ब्राजील, कोलंबिया, मेक्सिको, रूस और ईरान जैसे देशों ने कार्रवाई की निंदा की, जबकि कुछ ने मादुरो के शासन के अंत का स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “अभूतपूर्व सैन्य शक्ति का प्रदर्शन” बताया और कहा कि अमेरिका संक्रमण काल तक वेनेजुएला का प्रशासन संभालेगा।

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