Thursday , April 27 2017

टोल प्लाजा पर सैनिकों की तैनाती हमें बताए बगैर हुई : ममता

ममता बनर्जीकोलकाता| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर राज्य को अंधेरे में रखकर राजमार्ग पर दो पथकर वसूली चौकियों (टोल प्लाजा) पर सेना की तैनाती करने का आरोप लगाया। रक्षा मंत्रालय ने इस आरोप से यह कहते हुए इनकार किया है कि यह एक वार्षिक अभ्यास है, जो पूरे देश में चल रहा है। यह अभ्यास आकस्मिक स्थिति में वाहनों पर कितना वजन लादा गया है, उनके आंकड़े सेना को उपलब्ध कराने के लिए है।

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता ने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव इस बारे में केंद्र सरकार को लिख रहे हैं और दिल्ली को कोलकाता से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर डांकुनी और पालसित टोल प्लाजा पर कथित तौर पर सेना की तैनाती पर स्पष्टीकरण के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलेंगी।

बनर्जी ने यहां मीडिया से कहा, “राज्य सरकार को सूचित किए बगर प्रदेश में सेना की तैनाती की गई है। यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है। यह अस्वीकार्य है। हम इसके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। ऐसा कभी नहीं हुआ था।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “हम लोग इसका विस्तृत ब्योरा चाहते हैं। संघीय स्वरूप बाधित हो गया है और लोकतंत्र को दूषित कर दिया गया है। क्या आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। हम लोगों को कोई जानकारी नहीं है।”

बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक कार्यो का संचालन राज्य को सूचित किए बगैर सेना नहीं कर सकती। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति विषवमन जारी रखते हुए उन्होंने सवाल किया, “क्या देश के अंदर किसी तरह का युद्ध छेड़ने की योजना है? सड़कें हमारी हैं, हालांकि यह केंद्र के भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तहत श्रेणीबद्ध है, लेकिन इसका प्रशासन राज्य की कानून-व्यवस्था से चलता है।”

उन्होंने कहा कि जनता को परेशान किया जा रहा है और उनके वाहनों को पथकर संग्रह चौकियों पर रोका जा रहा है।

ममता ने कहा, “जनता घबराई हुई है। यदि यह बंगाल के नागरिक इलाकों में हो रहा है तो यह बिहार में भी हो सकता है, अगला उत्तर प्रदेश है, उसके बाद तमिलनाडु है और अन्य राज्य भी हैं। यह बहुत गंभीर स्थिति है और यह आपातकाल से भी अधिक खतरनाक है। हमलोग अत्यंत काले दिन का सामना कर रहे हैं।”

बनर्जी के इस सनसनीखेज आरोप लगाने के तत्काल बाद रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस बारे में डरने जैसा कुछ भी नहीं है और यह अभ्यास सरकार के आदेश के अनुसार किया गया है।

प्रवक्ता ने कहा कि पूर्वी कमान क्षेत्र में यह तीन दिवसीय अभ्यास किया जा रहा है और यह शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा।

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