पेड़ों की तादाद में कमी आने के बावजूद सोन चिड़िया दिल्ली लौटी

एजेन्सी/  108586-1920-londonनई दिल्ली: पेड़ों की तादाद में कमी आने और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के चलते बया यानी सोन चिड़िया ने दिल्ली को करीब-करीब अलविदा कह दिया था। हिन्दुस्तान में सोन या बया चिड़िया की चार प्रजाति पाई जाती हैं, लेकिन दो प्रजाति विलुप्ति-सी हो गई है।

दिल्ली में असोला भाटी को छोड़कर बाकी जगहों पर पांच साल से सोन चिड़िया दिल्ली में बहुत कम देखी जा रही थीं, लेकिन द्वारका के सेक्टर 10 के पास पांच साल बाद फिर से सोन चिड़िया के लटकते घोंसले देखे गए हैं। हालांकि पहले इन घोंसलों की तादात 200 के आसपास थी, लेकिन अब घटकर 50 रह गई है।

पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले अखिलेश पांडेय ने बताया कि आमतौर पर सोन या बया चिड़िया उन जगहों पर घोंसला बनाती है, जहां पानी या कंटीले पेड़ हों। ताकि उनके घोंसले शिकारी की पहुंच से दूर रहें, लेकिन मेट्रो सेक्टर 10 के स्टेशन से कुछ ही दूरी सोन चिड़िया ने अपने घोंसले बनाए हैं जबकि इस जगह पर जब तब पेड़ भी काटे जाते रहे हैं, लेकिन इन सबके बावजूद सोन चिड़िया अपने आशियाने को बचाने की जद्दो जहद में जुटी है।

तीन साल पहले बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी ने भी इस जगह का दौरा किया था, लेकिन वह भी देखकर हैरान रह गए कि द्वारका सेक्टर दस में बहुत कम जगह पर पचास से ज्यादा घोंसले बने हैं। पर्यावरण पर काम करने वाले दीवान सिंह बताते हैं कि जिस तरह से दिल्ली की बायोडायवर्सिटी को खत्म किया जा रहा है। प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है उससे गौरया चिड़ियां यहां से चली गई। हालांकि उसे बचाने की भी जद्दोजहद की जा रही है, लेकिन दिल्ली में ज्यादा से ज्यादा ग्रीन जोन बचाने की जरूरत है ताकि इस तरह की चिड़ियां बची रह सकें।

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