दिवाली के ठीक बाद बाजारों में छाई छठ की रौनक, ऐसा है यहां का नजारा

प्रयागराज।  सूर्य के साथ ही नहाय खाय के साथ ही इस पर्व की शुरुआत हो जाती है। इस त्योहार को बिहार और उत्तर पूर्वी राज्य में मनाया जाता है।

छठ की रौनक

सूर्य की उपासना के महापर्व छठ की  शुरुआत हो गई है | पूर्वांचल में सुहागिन महिलाओं के इस विशेष पर्व  में संगम नगरी में भी सुहागिनों ने इसके लिए अपने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं | छठ पूजा दिवाली के छठवें दिन मनाई जाती है। हालांकि पर्व की शुरुआत दीवाली के 3 दिन बाद से ही शुरू हो जाता है।

सूर्य उपासना के इस महापर्व की छटा अब हर जगह नजर आने लगी है | बाजारों में रौनक है – सूप . टोकरी से लेकर फलों  तक की दुकानों में सुहागिनों का खरीददारी का सिलसिला तेज हो गया है | लेकिन बाजार  में लगी महगाई की आग ने दुकानदारों से लेकर पूजा समाग्री खरीदने वालों का दिवाला नीकला दिया है | पूजा में इस्तमाल होने वाली हर सामग्री महगी हो गई है लेकिन उसके बावजूद भी बाज़ारो में रौनक दिखाई दे रही है।

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छठ पूजा मुख्य रूप से नदी के किनारे मनाया जाता है जहां महिलाये डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती है।

पुत्र और पति की लंबी आयु के लिए छठ पूजा का महापर्व मनाया जाता है।छठ पूजा का मुख्य दिन 2 नवम्बर की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य देने और 3 नवम्बर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने का है।

छठ पर्व के पहले दिन नहाय – ख़ास के साथ ही इस पर्व की शुरुआत हो गई  है| बाजारों में रौनक है और सुहागिन महिलाए अपने निर्जला व्रत के लिए आवश्यक पूजा सामग्री की खरीद दारी भी कर रही है | 31 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ शुरुआत हो गई है ।

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पहली नवम्बर को खरना और दो नवम्बर को सूर्य षष्ठी का मुख्य पर्व होगा।इस दिन वृतिजन डूबते सूर्य को अर्घ्य देगे। पर्व का समापन तीन नोवेम्बर यानी रविवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। छठ पूजा को लेकर सजे बाजार का जायज़ा लिया और श्रद्धालुओं से बात की हमारे संवादाता सैय्यद आकिब रज़ा ने

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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