Wednesday , October 18 2017

खुलासा : खून पसीने नहीं बल्कि ये गन्दा काम कर नोटों के ढेर पर बैठे ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप जब से सत्‍ता में आये हैं तभी से कुछ न कुछ उनके पीछे वि‍वाद लगा हुआ है। अब एक समाचार एजेंसी में छपे लेख से नया खुलासा हुआ है कि डोनाल्‍ड ट्रंप के दादा ने चकलाघर चलाकर दौलतमंद बने।

दरसल अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद मीडिया को दिए अपने पहले इंटरव्यू में साफ कहा कि वो 20 जनवरी 2017 को राष्ट्रपति पद संभालते ही प्रवासियों को बाहर भेजने से जुड़ी कार्रवाई को अंजाम देंगे। ट्रंप को उस समय तक शायद ही पता रहा हो कि जिस तरह वो लाखों लोगों को देश निकाला देने की बात कर रहे हैं कुछ वैसा ही कई दशक पहले उनके दादा के साथ हो चुका है।

राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप

जर्मन अखबार बिल्ड में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी जर्मनी में रहने वाले डोनाल्ड ट्रंप के दादा फ्रेडिरक ट्रंप ने जर्मनी अधिकारियों से पत्र लिखकर गुहरा लगाई थी कि उन्हें देशनिकाला न दिया जाए। ट्रंप के दादा को ये सजा आवश्यक सैन्य सेवा न करने के लिए दी गई थी।

एक समाचार एजेंसी के अनुसार ये पत्र 1905 में जर्मन राज्य बावरिया के प्रिंस लुइपोल को लिखा गया था। हालांकि राजा ने फ्रेडरिक ट्रंप की गुहार सुनी नहीं गई और उन्हें देश से बाहर जाना ही पड़ा।

ये बात तब की है जब जर्मनी में राजशाही थी और एकीकृत जर्मन राज्य का निर्माण नहीं हुआ था। फ्रेडरिक ट्रंप ने लुइपोल को “जनप्रिय, भद्र, बुद्धिमान और न्यायप्रिय” कह कर संबोधित किया था।

माना जा रहा है कि लुइपोल ने उनकी गुहार ठुकरा दी थी नतीजतन फ्रेडरिक को जर्मनी छोड़ना पड़ा। डोनाल्ड ट्रंप के पिता फ्रेड ट्रंप का जन्म अमेरिका में ही हुआ था। वो रियल एस्टेट कारोबारी थे। डोनाल्ड ने भी अपने पिता के कारोबार से ही अपना व्यावसायिक करियर शुरू किया था।

फ्रेडिरक ट्रंप अपने दक्षिणी जर्मनी स्थित गृह नगर से 1885 में 16 वर्ष की उम्र में अमेरिका गए थे। बावरिया से ट्रंप अवैध रूप से अमेरिका पहुंचे थे। उस समय बावरिया में सभी नौजवानों को सेना में आवश्यक रूप से सेवा देनी होती थी।

फ्रेडरिक ट्रंप सेना में नौकरी करने की जगह अमेरिका चले गए। इस वजह से करीब चार साल बाद बावरिया राज्य ने उनकी नागरिकता समाप्त कर दी।  माना जाता है कि फ्रेडिरक ट्रंप ने कनाडा के यूकोन इलाके में ढाबा और चकलाघर चलाकर काफी संपत्ति बटोरी। बाद में उन्होंने इसी इलाके में आर्कटिक रेस्तरां खोला जो काफी लोकप्रिय हुआ।

उस समय के एक पत्रकार ने लिखा था, “अकेले मर्दों के लिए आर्कटिक सबसे अच्छा रेस्तरां है।…लेकिन भली महिलाओं को मैं वहां जाने की सलाह नहीं दूंगा क्योंकि उन्हें वहां आपत्तिजनक आवाजें सुनने को मिल सकती हैं…”

फ्रेडरिक ट्रंप 1900 के आसपास दोबारा जर्मनी आने-जाने लगे। इन्हीं यात्राओं के दौरान वो जर्मनी में अपनी भावी पत्नी से मिले थे। शादी के बाद वो अपनी पूरी संपत्ति इकट्ठा कर वापस दोबारा जर्मनी में रहने चले आए।

लेकिन उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी। जर्मन रेडियो डॉयचे वैले के अनुसार फरवरी, 1905 के बावरिया राज्य की तरफ से जारी एक आदेश में कहा गया था, “अमेरिकी नागरिक और पेंशनयाफ्ता फ्रेडरिक ट्रंप को सूचित किया जाता है कि वो बावरिया राज्य से बाहर चले जाएं या फिर उन्हें प्रशासन बाहर भिजवा देगा।” इस आदेश को रद्द करने के लिए लिए ट्रंप ने प्रिंस लुइपोल को चिट्ठी लिखी लेकिन व्यर्थ।

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