कोर्ट परिसर में कन्हैया पर हुए हमले की SIT जांच से SC का इनकार

l_uu-1460400041 (1)एजेंसी /नई दिल्ली।

देशद्रोह के मामले में आरोपी जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान हुए हमले की जांच एसआईटी से कराए जाने की मांग को उच्चतम न्यायालय ने नकार दिया।

इस मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में एसआईटी जांच का आदेश तब तक नहीं दे सकता, जब तक यह साबित न हो जाए कि पुलिस इस केस में कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जेएनयू के पूर्व छात्र एन.डी जयप्रकाश की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट हमलावर वकीलों पर अदालत के आदेशों की अवमानना की मांग पर विचार करेगा।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस मामले में पुलिस ने सही ढंग से जांच एवं कार्रवाई नहीं की है। पुलिस की मौजूदगी में कन्हैया कुमार पर अदालत कक्ष में हमला किया गया। ऐसे में मामले की एसआईटी जांच का आदेश दिया जाना जरूरी है।

इस पर दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि उन्होंने इस मामले में न केवल एफआईआर दर्ज की है, बल्कि कार्रवाई भी की है। उन्होंने मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मारपीट के संबंध में तीन वकीलों और एक विधायक को गिरफ्तार किया है।

न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कहा कि मामले में एसआईटी जांच का आदेश दिया जाना तब तक संभव नहीं है, जब तक वह अदालत के समक्ष यह साबित न कर दें कि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह यह बताए कि आखिरकार उनकी मौजूदगी में कन्हैया पर हमला कैसे हो गया?

इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया से कोई मारपीट नहीं हुई है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 17 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के वक्त सुरक्षा चाक चौबंद थी। दिल्ली पुलिस ने अपना हलफनामा दायर कर पटियाला हाउस कोर्ट में निरीक्षण करने गए वकीलों के पैनल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैनल की रिपोर्ट एक तरफा है।

पैनल ने अपनी रिपोर्ट सिर्फ कन्हैया के बयान पर तैयार की। पैनल के लोगों ने पटियाला हाउस कोर्ट में दिल्ली पुलिस और रजिस्टार पर दबाव बनाया। उत्तेजित होकर सवाल पूछे और किसी को जवाब नहीं दिया। डीसीपी स्तर के ऑफिसर को सस्पेंड करने की धमकी दी।

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