कैंट स्टेशन आरपीएफ की टीम ने सॉफ्टवेयर से रेलवे की रिजर्वेशन व्यवस्था में सेंध लगाने वाले गिरोह को किया गिरफ्तार

कैंट स्टेशन आरपीएफ की टीम ने एक बार फिर सॉफ्टवेयर से रेलवे की रिजर्वेशन व्यवस्था में सेंध लगाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। बीती रात कपसेठी स्थित धवकलगंज में कार्रवाई के दौरान दीप ज्योति डिजिटल टूर एंड ट्रेवेल से मुंबई और सूरत के कंफर्म सात टिकट बरामद हुए। जिसे ‘क्विक तत्काल’ नामक मोबाइल एप से बनाया गया था। टीम ने अंकित कुमार नामक एजेंट को मौके से गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान लैपटॉप, पर्सनल आईडी से जुड़े दस्तावेज और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया। टीम में उप निरीक्षक रमेश कुमार, संदीप, कॉन्स्टेबल शिवकांत सिंह, हीरालाल यादव और मोहम्मद मोमिन शामिल थे। आरपीएफ इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिन्हा ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले साक्ष्यों के आधार पर धवकलगंज (कपसेठी) में कार्रवाई हुई। एजेंट ने दो वर्ष के अंदर पर्सनल आईडी से 2 लाख 58 हजार 145 रुपये मूल्य का 113 टिकट बनाया था। सर्विस चार्ज के नाम से प्रत्येक टिकट 100 से 200 रुपए यात्रियों से लिया जाता था। बताया कि रेलवे एक्ट की धारा 143 के तहत चालान कर अंकित को जेल भेजने की कार्रवाई चल रही है।

ऑनलाइन पर सॉफ्टवेयर की खरीद बिक्री

देश भर की एजेंसी अवैध सॉफ्टवेयर की जड़ को खंगालने में जुटी है। फिर भी गिरोह के सरगना और बिचौलिए कानून के शिकंजे से बचते चले जा रहे हैं। दरअसल, ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ही एजेंट और डेवलपर के बीच सॉफ्टवेयर की खरीद बिक्री होती है। इंस्पेक्टर अनूप कुमार सिन्हा ने बताया कि यूट्यूब प्लेटफार्म पर वीडियो के जरिए डेवलपर लोगों को आकर्षित करते हैं। तय समय सीमा तक सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने वाले को ऑनलाइन शुल्क चुकाना पड़ता है।

सॉफ्टवेयर की मदद से टिकट बुकिंग में कम समय

विशेषज्ञों के मुताबिक रेड चिली, तत्काल प्लस और क्विक तत्काल, एएनएमएस, मैक व जगुआर जैसे अवैध सॉफ्टवेयर आईआरसीटीसी के लॉगिन कैप्चा, बुकिंग कैप्चा और बैंक ओटीपी की बाइपास करते हैं। वास्तविक ग्राहकों को इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। एक सामान्य ग्राहक के लिए बुकिंग प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग 2.55 मिनट लगते हैं, लेकिन ऐसे सॉफ्टवेयरों का उपयोग करने वाले इसे लगभग 1.48 मिनट में पूरी कर लेते।

बुक नहीं कर सकते तत्काल टिकट

रेलवे एजेंटों को तत्काल टिकट बुक करने की अनुमति नहीं देता। ऐसे कई एजेंट हत्थे चढ़े, जो सॉफ्टवेयरों के जरिए टिकट बुक कर रहे थे। ऐसे में अन्य लोगों के लिए तत्काल टिकट प्राप्त करना वस्तुत: असंभव हो गया। दो पालियों में सुबह 10.15 बजे और 11.15 बजे के बाद ही एजेंट को तत्काल टिकट बुक करने की अनुमति दी गई है।

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