अब भी आवास पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं झोपड़ी में रह रहे लोग….

भले की सरकार ने गरीब परिवारों को आवास देने के लिए वायदा किया हो, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कई पात्र इससे वंचित हैं। बारिश के मौसम में झोपड़ी में रह रहे पात्र व्यक्ति अब भी आवास पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन इसका लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।

एक महिला जिसने अपने पति की बीमारी के इलाज के लिए सब कुछ बेंच दिया। अब उसके पास जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं बचा है वह खुले में झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री जी ने सब को आवास दिया, लेकिन वह अभी इससे महरूम है। यह कहानी है कस्बा फफूंद मोहल्ला जुबैरी निवासी भूमि हीन निर्धन आसिया बेगम की, जिसे एक आशियाने का इंतजार है। नगर के मोहल्ला जुबैरी निवासी आसिया बेगम पत्नी हफीजुद्दीन मोहल्ला के एक प्लाट पर झोपड़ी और टट्टर डालकर अपनी जिदगी गुजार रही है। मोहल्ला के अधिकतर झोपड़ी और कच्चे मकान वालों को उनको अपनी पक्की छत मिल गई है लेकिन भूमिहीन आसिया अपना सिर छुपाने के लिए आशियाने की आस लगाए हुए हैं कि उसका भी अपना घर होगा। इनसेट :

दूसरी किस्त न आने से बढ़ी मुसीबत

नगर मोहल्ला जुबैरी निवासी सगीर पुत्र वशीर, अली मुहम्मद पुत्र वली मुहम्मद,नसीमा पत्नी नईम का कहना है कि लगभग 10 माह पहले आवास की पहली किस्त आई थी, लेकिन सर्दी ,गर्मी, बरसात गुजर गई एक साल हो गए, लेकिन अभी दूसरी किस्त नहीं आई है। जिससे आवास अधूरे पड़े हैं। बरसात के मौसम में बहुत ही परेशानी हो रही है। दूसरी किस्त के लिए कई बार कहा लेकिन सुनवाई नही हो रही है। कच्चे मकान में जो सिर छुपाने की जगह थी अब वह भी नहीं है। साल बीत गया नहीं आई पहली किस्त

मोहल्ला जुबैरी निवासी छोटे पुत्र गफूर, नईम पुत्र अब्दुल हकीम, रब्बानी पुत्र गुलामी, शकील पुत्र शकूर, नफीसा बेगम पत्नी सलीम व शाहीन बेगम पत्नी रफीक का कहना है कि आवास स्वीकृत हुए एक साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक पहली किस्त नहीं आई। हम लोग फाइलें भी जमा कर चुके हैं। डूडा के कई चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन कोई सुनने वाला नही है। एक साल से अधिक समय से हम लोग आस लगाए हुए है।

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