Tag Archives: प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग: सुंदरता

सुंदरता

एक कौआ सोचने लगा कि पंछियों में मैं सबसे ज्यादा कुरूप हूँ। न तो मेरी आवाज ही अच्छी है, न ही मेरे पंख सुंदर हैं। मैं काला-कलूटा हूँ। ऐसा सोचने से उसके अंदर हीनभावना भरने लगी और वह दुखी रहने लगा। एक दिन एक बगुले ने उसे उदास देखा तो ...

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प्रेरक- प्रसंग: विवेकानंद उसकी बात मान लेते तो वकील होते

प्रेरक- प्रसंग: विवेकानंद उसकी बात मान लेते तो वकील होते

आज प्रस्तुत है स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से जुड़ा एक रोचक संस्मरण – एकांत को दृष्टिगत रखते हुए नरेंद्र (विवेकानंद के बचपन का नाम) अपने नाना के घर पर अकेले रहकर पढ़ाई करते थे। एक शाम एक व्यक्ति आया और उसने नरेंद्र से कहा, ‘तत्काल घर चलो। तुम्हारे पिता ...

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प्रेरक-प्रसंग: आशा का दीपक

आशा का दीपक

एक कमरे में चार दीपक जल रहे थे और वहां के परिवेश में एक शान्ति छाई हुई थी शान्ति भी ऐसी थी कि उनकी मंद स्वर में की जाने वाली बात को भी आसानी से सुना जा सकता था | पहले दीपक ने दुखी स्वर में कहा – “मैं शान्ति ...

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प्रेरक प्रसंग : मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

प्रेरक प्रसंग

यही सफलता और असफलता के बीच का फर्क है जिसे हम विश्वास या आत्मविश्वास कह सकते है क्योकि सारा खेल विश्वास का ही है| विश्वास पत्थर को भगवान बना सकता है और अविश्वास भगवान के बनाए इन्सान को पत्थरदिल बना सकता है| मैंने जब से इस बात पर विश्वास करना ...

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प्रेरक प्रसंग : मौत का सौदागर अल्फ्रेड नोबेल

प्रेरक प्रसंग : मौत का सौदागर अल्फ्रेड नोबेल

यह वाक्या 1888 का है. सुबह-सुबह एक व्यक्ति अखबार पढ़ रहा था. अखबार पढ़ते-पढ़ते अचानक उसकी नज़र “शोक-संदेश” के कॉलम पर पड़ी. अपना नाम वहाँ देखकर वह हैरान रह गया. गलती से अख़बार ने उसके भाई लुडविग के स्थान पर उसके निधन का समाचार प्रकाशित कर दिया था. खुद को ...

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प्रेरक प्रसंग : मुझे भी गुरु बनना है…

मुझे भी गुरु बनना है...

एक नवदीक्षित शिष्य ने अपने गुरु के साथ कुछ दिन व्यतीत करने के बाद एक दिन पूछा-  गुरुदेव, मेरा भी मन करता है कि आपकी ही तरह मेरे भी कई शिष्य हों और सभी मुझे भी  आप जैसा ही मान-सम्मान दे। गुरु ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा- कई वर्षों की ...

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प्रेरक-प्रसंग: कड़ी मेहनत करता हूं, लेकिन सफलता नहीं मिलती

प्रेरक-प्रसंग

स्वामी विवेकानंद से जुड़े प्रसंगो में जीवन प्रबंधन के कई ऐसे सूत्र छिपे होते हैं, जिन्हें अपनाने से हमारी कई परेशानियां खत्म हो सकती हैं। काफी लोग ऐसे हैं जो मेहनत तो काफी अधिक करते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते हैं। इस संबंध में स्वामी विवेकानंद का एक प्रसंग ...

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प्रेरक-प्रसंग: आखिर अरस्तू ने अपने गुरु को क्यों बताया मूर्ख

प्रेरक-प्रसंग

एक बार यूनान के दार्शनिक अरस्तू से एक विद्वान ने कहा, ‘मैं आपके गुरु से मिलना चाहता हूं।’ अरस्तू ने जवाब दिया, ‘आप हमारे गुरु से मिल नहीं सकते।’ विद्वान ने कहा, ‘क्या वह अब इस दुनिया में नहीं हैं?’ अरस्तू ने कहा, ‘हमारे गुरु कभी नहीं मरते।’ विद्वान को ...

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प्रेरक-प्रसंग: परिश्रम का ज्ञान 

परिश्रम का ज्ञान 

  बुद्ध की सभा में हर तरह के लोग आते थे। उनमें भोले ग्रामीण, विद्यार्थी, महिलाएं, नगरसेठ भी होते थे। सभा में सबको समान रूप से मान-सम्मान मिलता था और बुद्ध उन्हें उनके स्तर के अनुरूप ही शिक्षा देते थे। अपने प्रभावशाली तरीके से वह भक्तों के हृदय में उतर ...

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प्रेरक-प्रसंग: ‘‘ज्ञानी तो निडर भया’’

प्रेरक-प्रसंग: ‘‘ज्ञानी तो निडर भया’’

एक गुरू गोविन्दसिंह जी ने शिष्यों की परीक्षा लेनी चाही । उन्होंने तम्बू में पहले से पाँच बकरे बाँधकर रख दिये । और उपस्थित सिक्ख समूह के सामने, जिनकी संख्या लगभग पाँच हजार थी । हाथ में नंगी तलवार लेकर आये और कहा, क्या तुममें से कोई एक अपना सिर ...

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