Tag Archives: प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग : बुरी संगति

बुरी संगति

पुराने समय की बात है। एक राज्य में एक राजा था। किसी कारण से वह अन्य गाँव में जाना चाहता था। एक दिन वह धनुष-बाण सहित पैदल ही चल पड़ा। चलते-चलते राजा थक गया। अत: वह बीच रास्ते में ही एक विशाल पेड़ के नीचे बैठ गया। राजा अपने धनुष-बाण ...

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प्रेरक-प्रसंग : राजा की चतुराई

राजा की चतुराई

वजीर के अवकाश लेने के बाद बादशाह ने वजीर के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवार बुलवाए। कठिन परीक्षा से गुज़र कर तीन उम्मीदवार योग्य पाए गए। तीनों उम्मीदवारों से बादशाह ने एक-एक कर एक ही सवाल किया, ‘मान लो मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एकसाथ आग लग जाए ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिलों में दूरियां

दिलों में दूरियां

एक बार एक संत अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। अचानक उन्होंने सभी शिष्यों से एक सवाल पूछा। बताओ जब दो लोग एक दूसरे पर गुस्सा करते हैं तो जोर-जोर से चिल्लाते क्यों हैं? शिष्यों ने कुछ देर सोचा और एक ने उत्तर दिया : हम अपनी शांति खो चुके ...

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प्रेरक-प्रसंग : सही चुनाव

सही चुनाव

एक राजा को अपने दरबार के किसी उत्तरदायित्वपूर्ण पद के लिए योग्य और विश्वसनीय व्यक्ति की तलाश थी। उसने अपने आस-पास के युवकों को परखना शुरू किया। लेकिन वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाया। तभी एक महात्मा का पदार्पण हुआ, जो इसी तरह यदा-कदा अतिथि बनकर सम्मानित हुआ करते ...

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प्रेरक-प्रसंग: जब क्रोध बना विनाश का कारण

जब क्रोध बना विनाश का कारण

बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ मे निर्णायक थी- मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती। हार-जीत का निर्णय होना बाक़ी था, इसी बीच देवी भारती को किसी आवश्यक कार्य से कुछ समय के लिये बाहर ...

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प्रेरक-प्रसंग: एक पंडित की कहानी… जिसे वेश्या ने दिया ‘गुरु-मंत्र’

प्रेरक-प्रसंग

एक पंडित जी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद अपने गांव लौटे। गांव के एक किसान ने उनसे पूछा, पंडित जी आप हमें यह बताइए कि पाप का गुरु कौन है? प्रश्न सुन कर पंडित जी चकरा गए, क्योंकि भौतिक व आध्यात्मिक गुरु तो होते ...

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प्रेरक-प्रसंग: सुंदर चेहरे पर मर मिटने वालों को सबक सिखा देगी ये कहानी

प्रेरक-प्रसंग

यूनान के महान दार्शनिक सुकरात सुदर्शन नहीं थे. उनका चेहरा कुरूप था. एक दिन अपने कक्ष में बैठकर वह आईने में अपना चेहरा देख रहे थे. तभी उनके एक शिष्य ने कक्ष में प्रवेश किया. सुकरात को आईना देखते हुए पाकर शिष्य के होंठों पर मुस्कराहट तैर गई. यह देख ...

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किसी ने सही कहा है, सम्मान चाहिए तो पहले सम्मान देना सीखें

सम्मान चाहिए तो पहले सम्मान देना सीखें

बहुत पुरानी बात है। एक व्यक्ति अक्सर धर्मग्रंथों का मजाक उड़ाया करता था। वह नास्तिक था। वह ईश्वर में विश्वास करने वालों का सम्मान नहीं करता था। वह उनसे वैचारिक बहस न करके, कुतर्कों के जरिए उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश करता था। एक दिन वह एक पादरी के पास ...

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प्रेरक-प्रसंग: लालच बनी मौत

लालच बनी मौत

रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी से शीरे के बड़े-बड़े ड्रम उतारे जा रहे थे। उन ड्रमों से थोड़ा-थोड़ा शीरा मालगाड़ी के पास नीचे ज़मीन पर गिर रहा था। जहाँ शीरा गिरा था मक्खियाँ आकर बैठ गई और शीरा चाटने लगीं। ऐसा करने से उनके छोटे-छोटे मुलायम पंख उस शीरे में ही ...

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प्रेरक-प्रसंग: एक कहानी… उन इंसानों के लिए जो अपने धर्म को सबसे उंचा बताते हैं

प्रेरक-प्रसंग

बात उन दिनों की है जब भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद, महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिन्दू विचारक छोटे हुआ करते थे। वे मद्रास के एक ईसाई मिशन स्कूल में पढ़ते थे। एक दिन की बात है जब वह अपनी ...

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