Tag Archives: चाणक्‍य नीति

चाणक्य नीति

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बदबू सिर्फ सड़े हुए फूलों से आती है क्योंकि खिले हुए फूल तो हमेशा खुशबू फैलाते हैं। इसी तरह जो व्यक्ति दूसरों का अपमान करता है ऐसे व्यक्ति की सोच बहुत ही छोटी होती है। =>

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अपने निकट संबंधियों का अपमान करने से जान जाती है। दूसरों का अपमान करने से दौलत जाती है। राजा का अपमान करने से सब कुछ जाता है। एक ब्राह्मण का अपमान करने से कुल का नाश हो जाता है।   =>

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मन में सोचे हुए कार्य को किसी के सामने प्रकट न करें बल्कि मनन पूर्वक उसकी सुरक्षा करते हुए उसे कार्य में बदल दें।   =>

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चाणक्य नीति

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चाणक्य कहते हैं कि जो मित्र हमारे सामने मीठी बातें करते हैं, हमारी तारीफ करते हैं और पीठ पीछे बुराई करते हैं, काम बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, उससे मित्रता नहीं रखनी चाहिए। =>

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हम अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रखे। हम छाना हुआ जल पिए। हम वही बात बोले जो शास्त्र सम्मत है। हम वही काम करे जिसके बारे में हम सावधानीपूर्वक सोच चुके है। =>

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यह सही है कि धन ही सबकुछ नहीं होता लेकिन धन से ही सबकुछ पाया जा सकता है। कहते हैं कि धन से आपके जीवन की लगभग 70 प्रतिशत समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती है यह अलग बात है कि आप धन के बल पर समस्याएं खड़ी करने में ...

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