Wednesday , September 26 2018

Tag Archives: चाणक्‍य नीति

चाणक्य नीति

चाणक्य नीति

यदि आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी उस पल को वह शुभ कर्म करने में खर्च करे। एक कल्प तक जी कर कोई लाभ नहीं। दोनों लोक इस लोक और पर-लोक में तकलीफ होती है।   =>

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चाणक्य नीति

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यदि आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी उस पल को वह शुभ कर्म करने में खर्च करे। एक कल्प तक जी कर कोई लाभ नहीं क्‍योंकि दोनों लोक, इस लोक और पर-लोक में तकलीफ होती है। =>

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चाणक्य नीति

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एक दुष्ट के मन में सद्गुणों का उदय हो सकता है यदि वह एक भक्त से सत्संग करता है। लेकिन दुष्ट का संग करने से भक्त दूषित नहीं होता। जमीन पर जो फूल गिरता है उससे धरती सुगन्धित होती है लेकिन पुष्प को धरती की गंध नहीं लगती। =>

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चाणक्य नीति

चाणक्य नीति

हम अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रखे। हम छाना हुआ जल पिए। हम वही बात बोले जो शास्त्र सम्मत है। हम वही काम करे जिसके बारे में हम सावधानीपूर्वक सोच चुके है। =>

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चाणक्य नीति

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बसंत ऋतू क्या करेगी यदि बास पर पत्ते नहीं आते। सूर्य का क्या दोष यदि उल्लू दिन में देख नहीं सकता। बादलो का क्या दोष यदि बारिश की बूंदे चातक पक्षी की चोच में नहीं गिरती। उसे कोई कैसे बदल सकता है जो किसी के मूल में है। =>

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जो एक संकट का सामना करने वाले ब्राह्मण को भक्ति भाव से अल्प दान देता है उसे बदले में विपुल लाभ होता है। =>

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चाणक्य नीति

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जो घर गृहस्थी के काम में लगा रहता है वह कभी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। मांस खाने वाले के ह्रदय में दया नहीं हो सकती। लोभी व्यक्ति कभी सत्य भाषण नहीं कर सकता। और एक शिकारी में कभी शुद्धता नहीं हो सकती। =>

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हम अपना हर कदम फूक फूक कर रखे। हम छाना हुआ जल पिए। हम वही बात बोले जो शास्त्र सम्मत है। हम वही काम करे जिसके बारे हम सावधानीपुर्वक सोच चुके है। =>

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जो घर गृहस्थी के काम में लगा रहता है वह कभी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता। मॉस खाने वाले के ह्रदय में दया नहीं हो सकती। लोभी व्यक्ति कभी सत्य भाषण नहीं कर सकता। और एक शिकारी में कभी शुद्धता नहीं हो सकती। =>

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चाणक्य नीति

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अपने निकट संबंधियों का अपमान करने से जान जाती है। दूसरों का अपमान करने से दौलत जाती है। राजा का अपमान करने से सब कुछ जाता है। एक ब्राह्मण का अपमान करने से कुल का नाश हो जाता है।   =>

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