पासवान ने आंबेडकर और दलितों को ‘नजरअंदाज’ करने पर विपक्ष पर दागे सवाल

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने विपक्षी दलों पर सत्ता में रहने पर डॉ. बी.आर. आंबेडकर और दलितों को ‘नजरअंदाज’ व ‘किनारे किए जाने’ पर हमला बोला और कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व समाजवादी पार्टी (सपा) से पूछा कि क्यों उनके कृत्य दलित नेता और समुदाय के हितों के खिलाफ थे।

राम विलास पासवान

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के अध्यक्ष 14 तथ्यों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर सवाल दागे। इसमें सबसे पुरानी पार्टी द्वारा चुनाव में आंबेडकर के खिलाफ लड़ना और ‘भारत रत्न’ प्रदान करने में असफल रहने जैसे तथ्य शामिल थे। ‘भारत रत्न’ देश का सर्वोच्च और सबसे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार है।

लोजपा के एक समारोह में अनुसूचित जाति और जनजातीय (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम 1989 को उसके मूल प्रारूप में बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए पासवान ने कहा कि विपक्ष राजग सरकार को दलित विरोधी के रूप में चित्रित करने का प्रयास कर रहा है, इसके विपरीत सरकार ने दलितों के फायदे के लिए कई कदम उठाए हैं।

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उन्होंने कहा, “बाबा साहेब ने दो बार लोकसभा चुनाव लड़ा, एक बार महाराष्ट्र के भंडारा और दूसरी बार दक्षिणी मुंबई से। दोनों ही मौकों पर कांग्रेस ने उन्हें हराने का प्रयास किया। उन्हें बताना चाहिए कि क्यों? एक ही परिवार के तीन सदस्य मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की प्रतिमा संसद के केंद्रीय हॉल में हैं। लेकिन बाबा साहेब की प्रतिमा वहां नहीं है क्यों?”

पासवान ने कहा, “कांग्रेस ने कई लोगों को भारत रत्न दिया लेकिन क्यों बाबा साहेब को इस सम्मान से वंचित रखा गया? बाबा साहेब के जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश क्यों नहीं घोषित किया गया?”

पासवान ने एससी/एसटी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और जनजातियों को नियो-बुद्धिस्ट का दर्जा देने पर कांग्रेस के नरम रुख पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

उन्होंने कहा, “राजग सरकार ने एससी/एसटी अधिनियम को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं और आरक्षण में बढ़ावा देने व लंदन में बाबा साहेब के घर को खरीदना सुनिश्चित किया है।”

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उन्होंने कहा कि उनके पार्टी कार्यकर्ता अधिनियम को बहाल करने के मोदी के ऐतिहासिक फैसले का धन्यवाद देने के लिए देश भर में जश्न मनाएंगे।

पासवान ने दलित नेता मायावती पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती ने एससी-एसटी अधिनियम को कमजोर करने वाला आदेश दिया। आदेश में कहा गया कि वरिष्ठ अधिकारी की जांच के बाद ही मामला दर्ज हो। उन्होंने यह आदेश दिया कि एससी-एसटी महिला के साथ दुष्कर्म होने पर मेडिकल पुष्टि होने के बाद ही एफआईआर दर्ज किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “इन तथ्यों से यह साबित होता है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी सहित विपक्ष का महागठबंधन दलित विरोधी है।”

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