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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कल भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए बीजिंग जायेंगे

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे, जहां वे अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता में भाग लेंगे। दोनों देशों के बीच मंगलवार को वार्ता का 25वां दौर आयोजित किया जाएगा। ये वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने और सैन्य टकराव की स्थिति को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती की थी।

हाल के वर्षों में, दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य एलएसी से सैनिकों की वापसी, सैन्य अलगाव और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना रहा है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान खोजने के लिए विशेष प्रतिनिधि सभा एक महत्वपूर्ण मंच है। इस सभा के अंतर्गत भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वार्ता करते हैं। इसका उद्देश्य न केवल मौजूदा सैन्य तनाव को कम करना है, बल्कि सीमा विवाद के व्यापक और दीर्घकालिक समाधान के लिए राजनीतिक मार्ग खोजना भी है।

डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली वार्ता में एलएसी की स्थिति, सीमा शांति, सैन्य तैनाती, सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों से संबंधित मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा होने की संभावना है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की मूलभूत शर्त है। चीन ने भी सीमा विवाद को बातचीत के माध्यम से हल करने पर जोर दिया है। इस बैठक का महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच राजनयिक संवाद और सैन्य स्तर की वार्ता दोनों ही भारत और चीन के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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