Maha Kumbh Mela 2021: 1938 में भी ग्यारह वर्ष में हुआ था कुंभ, भगदड़ में सैकड़ों श्रद्धालुओं की गई थी जान
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इस बार हरिद्वार कुंभ 12 की बजाय 11 वर्ष बाद पड़ रहा है। 82 साल बाद ऐसा सयोंग है कि हरिद्वार कुंभ बारह की बजाय ग्यारह वर्ष बाद पड़ रहा है। इससे पहले 1938 में यह कुंभ ग्यारह वर्ष बाद पड़ा था। उस दौरान कुंभ में भीषण हादसा हुआ था।
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कुंभ मेले बारह वर्ष बाद आते हैं। ग्रहों के राजा बृहस्पति कुंभ राशि में प्रत्येक बारह वर्ष बाद प्रवेश करते हैं। प्रवेश की गति में हर बारह वर्ष में अंतर आता है। यह अंतर बढ़ते बढ़ते सात कुंभ बीत जाने पर एक वर्ष कम हो जाता है।
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इस कारण प्रत्येक आठवां कुंभ ग्यारहवें वर्ष में पड़ता है। वर्ष 1927 में हरिद्वार में सातवां कुंभ था। आठवां कुंभ 1939 में बारहवें वर्ष आने की बजाय 1938 में ग्यारहवें वर्ष आया। तब नाव का पुल बनाकर गंगा के पार वर्तमान शोल क्षेत्र और रोड़ी मैदान में 1938 का कुंभ मेला लगा था।
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यह मेला और बाजार हजारों छप्परों में लगा था। अचानक छप्परों में हलवाई की भट्टी से आग लग गई। देखते ही देखते यह आग पूरे मेला क्षेत्र में फैल गई। इससे भगदड़ मच गई और सैकड़ों यात्रियों को जान गंवानी पड़ी।
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इनमें कई जल गए और कई गंगा में बह गए थे। उस समय आज की तरह प्रबंध नहीं होते थे। उसी भयावह कांड के बाद 1950 के कुंभ मेले से व्यापक प्रबंध शुरू हुए।