
रूस की राजधानी मास्को से एक बेहद चिंताजनक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी एक सॉफ्टवेयर/सिस्टम इंजीनियर चंदन गुप्ता को स्थानीय पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पति के अचानक हिरासत में लिए जाने के बाद मास्को में अपने 10 वर्षीय बेटे के साथ फंसी पत्नी स्नेहा चंदन गुप्ता ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो जारी कर भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
स्नेहा ने आशंका जताई है कि उनके पति पर रूसी सेना में जबरन शामिल होने का दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है कि उनके पति की सुरक्षित रिहाई और भारत वापसी सुनिश्चित कराई जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से कानपुर के रहने वाले चंदन गुप्ता नोएडा के सेक्टर 62 स्थित एक कंपनी में कार्यरत हैं और कंपनी के असाइनमेंट के सिलसिले में वैध वर्क वीजा पर रूस गए थे। पत्नी स्नेहा के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे मास्को पुलिस ने चंदन को बिना किसी स्पष्ट आरोप के हिरासत में ले लिया और जेल भेज दिया। स्नेहा का कहना है कि उनके पति ने कोई गलत काम नहीं किया है।
रूसी भाषा की जानकारी न होने के कारण वह यह भी नहीं समझ पा रही हैं कि उनके पति को किस आरोप में पकड़ा गया है और उन्हें कहां रखा गया है। विदेश की धरती पर अकेले अपने 10 साल के मासूम बच्चे के साथ फंसी स्नेहा इस अप्रत्याशित संकट से बुरी तरह घबराई हुई हैं।
वीडियो संदेश में स्नेहा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध के चलते रूसी सेना में सैनिकों की भारी कमी हो गई है, जिसके कारण विदेशी नागरिकों और भारतीयों को सेना में भर्ती करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अंदेशा जताया है कि उनके पति को भी इसी दबाव तंत्र का शिकार बनाया जा सकता है। स्नेहा ने यह भी आरोप लगाया कि मास्को डे के आसपास भी उनके पति को प्रताड़ित किया गया था।
हालांकि, चंदन की हिरासत के कारणों, उन पर लगे आरोपों या सेना में भर्ती की किसी आधिकारिक प्रक्रिया को लेकर अब तक न तो संबंधित कंपनी, न ही भारतीय दूतावास और न ही रूसी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी किया गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान पहले भी भारतीय नागरिकों को धोखे या जबरन रूसी सेना में शामिल किए जाने के कई मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक करीब 202 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए थे, जिनमें से 26 लोगों की मौत हो चुकी है और सात लापता बताए गए।
भारत सरकार राजनयिक प्रयासों के जरिए अब तक 139 नागरिकों की सुरक्षित रिहाई और वतन वापसी करा चुकी है, जबकि करीब दो दर्जन लोग अब भी वहां फंसे हैं। विदेश मंत्रालय ने फर्जी जॉब ऑफर और युद्धग्रस्त इलाकों में नौकरी के झांसे को लेकर चेतावनी भी जारी की थी। फिलहाल मास्को में फंसे इस भारतीय परिवार के सामने विकट संकट खड़ा है और वे देश के शीर्ष नेतृत्व से सुरक्षित स्वदेश वापसी की टकटकी लगाए बैठे हैं।



