
इजराइल में मंगलवार को वह महत्वपूर्ण मतदान होगा जो मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भविष्य तय करेगा। इन चुनावों को नेतन्याहू के लिए एक अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी 7 अक्टूबर, 2023 के हमास हमले और ईरान युद्ध से निपटने के तरीके को लेकर आलोचना की जा रही है। इन चुनावों में लगभग 73 लाख लोग मतदान करने के पात्र हैं, और सर्वेक्षणों से पता चलता है कि उनमें से अधिकांश स्वयं को मध्य-दक्षिणपंथी या दक्षिणपंथी मानते हैं। हजारों लोग देश के भविष्य का फैसला करने वाले इस चुनाव में अपना वोट डालने के लिए इज़राइल लौट चुके हैं।
नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
77 वर्षीय नेतन्याहू इज़राइल के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री हैं और देश में उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। इन सबके बावजूद, इन चुनावों में उनके लिए कड़ी टक्कर होने की आशंका है, क्योंकि सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि उन्हें अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी और मध्यमार्गी नेता गादी आइज़ेनकोट से कांटे की टक्कर मिल रही है। नेतन्याहू प्रशासन पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, और कई लोग ईरान युद्ध से संबंधित उनके फैसलों और हमास के उस हमले से निपटने के उनके तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, जिसमें 7 अक्टूबर, 2023 की घटना है जिसमे इज़राइल में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे। इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ और मध्यमार्गी याशर पार्टी के नेता आइज़ेनकोट ने खुद को एक विकल्प के रूप में पेश किया है।




