भारत की अर्थव्यवस्था का नया रूप, मोदी के नेतृत्व में हर महीने बढ़ रहा विकास

नई दिल्ली| नोटबंदी और वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद छाई मंदी से निकलने का संकेत देते हुए, वित्तवर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) दर 7.7 फीसदी रही, जबकि पूर्ण वित्त वर्ष 2017-18 में यह 6.7 फीसदी रही। ये आधिकारिक आंकड़े गुरुवार को जारी किए गए। जीडीपी की विकास दर तीसरी तिमाही में 7 फीसदी रही थी। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने ट्विटर के माध्यम से कहा, “हर तिमाही जीडीपी की विकास दर बढ़ रही है और वित्तवर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में यह 7.7 फीसदी रही है। जो कि दिखाता है कि अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है और भविष्य में और ऊंची विकास दर रहने की संभावना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में सही विकास है।”

पीयूष गोयल

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, “वित्तवर्ष 2011-12 की कीमतों को आधार वर्ष मानते हुए, वित्तवर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में जीडीपी की विकास दर 7.7 फीसदी दर्ज की गई, जबकि पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्रमश: 5.6 फीसदी, 6.3 फीसदी और 7 फीसदी रही थी। इसमें कृषि (4.5 फीसदी), विनिर्माण (9.1 फीसदी) और निर्माण (11.5 फीसदी) क्षेत्र में हुई तेज वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा।”

सेक्टरों के आधार पर देखें तो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों, उद्योग और सेवाओं के क्षेत्रों में 2017-18 की चौथी तिमाही में सकल मूल्यवर्धित (जीवीए) वृद्धि दर क्रमश: 4.5 प्रतिशत, 8.8 प्रतिशत और 7.7 प्रतिशत रही। जीवीए में कर तो शामिल होता है, लेकिन सब्सिडी की गणना नहीं की जाती।

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आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने संवाददाताओं को बताया, “चौथी तिमाही अच्छी रहने की उम्मीद थी और यह आंकड़ों में भी दिख रहा है। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में तेजी विकास दर की गति को दर्शाता है, जिससे आगे भी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।”

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा, “जीएसटी का असर अब पीछे छूट चुका है।”

बयान में कहा गया कि जिन सेक्टरों की विकास दर 7 फीसदी से अधिक दर्ज की गई, उनमें ‘लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं’ (10 फीसदी), ‘व्यापार, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रांडकास्टिंग सेवाएं (8 फीसदी)’ और ‘बिजली, गैस, पानी आपूर्ति और अन्य उपभोक्ता सेवाएं (7.2 फीसदी)’ शामिल रहे।

बयान में कहा गया कि ‘कृषि, वानिकी और मछली पकड़ने’, ‘खनन और उत्खनन’, ‘विनिर्माण’, ‘निर्माण’, और ‘वित्तीय, अचल संपत्ति और पेशेवर सेवाओं’ की वृद्धि दर क्रमश: 3.4 फीसदी, 2.9 फीसदी, 5.7 फीसदी, 5.7 फीसदी और 6.6 फीसदी रही।

बयान में बताया गया, “वित्तवर्ष 2011-12 की कीमतों के आधार पर सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) वित्तवर्ष 2017-18 में 128.64 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि इसके पिछले साल यह 120.52 लाख करोड़ रुपये थी। वृद्धिदर के संदर्भ में वित्तवर्ष 2017-18 में जीएनआई में 6.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि वित्तवर्ष 2016-17 में यह 7.1 फीसदी थी।”

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वित्तवर्ष 2011-12 की कीमतों के आधार पर प्रति व्यक्ति आय वित्तवर्ष 2017-18 के दौरान 86,668 रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जोकि वित्तवर्ष 2016-17 में 82,229 रुपये थी। प्रति व्यक्ति आय में वित्तवर्ष 2017-18 के दौरान 5.4 फीसदी और इसके पिछले साल 5.7 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की गई।

बयान में कहा गया कि वित्तवर्ष 2017-18 के लिए राष्ट्रीय आय का अनंतिम अनुमान 6.7 फीसदी लगाया गया है। इसी वित्तवर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 7 फीसदी थी।

जीडीपी आंकड़ों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी लौट रही है और निवेश व उपभोग दोनों में तेजी आई है। हालांकि तेल की ऊंची कीमतें और कठिन वित्तीय परिस्थितियों के कारण विकास की गति प्रभावित होगी।”

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