विश्व गुरु बनने के लिए भारत को करना ही होगा ये जटिल काम

नई दिल्ली| उद्योग संगठन एसोचैम ने रविवार को कहा कि भारत सरकार को कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) से संबंधित अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। एसोचैम ने ब्रिटिश सलाहकार व बहुराष्ट्रीय कंपनी प्राइसवाटरहाउसकूपर (पीडब्ल्यूसी) के साथ अपने संयुक्त अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय (एमईए) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, सिंगापुर, इजरायल और चीन जैसे अग्रणी देशों के साथ मिलकर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का समधान तलाशने के लिए काम करना चाहिए और एआई, मशीन लर्निग (एमएल) व अन्य नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रणनीति बनाने में तेजी लानी चाहिए।

एसोचैम
उद्योग संगठन ने अपने अध्ययन ‘एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर ग्रोथ : लेवरेजिंग एआई एंड रोबोटिक्स फॉर इंडिया’ में कहा है, “पूर्व के उपक्रमों के बेहतर कार्यो का आदान-प्रदान व अध्ययन सहयोग को मजबूती प्रदान करने का एक तरीका है।”

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अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया है कि एआई में नीतिगत योजना का मकसद ऐसे तंत्र का निर्माण है, जो अनुसंधान, नवाचार और अनुप्रयोगों के वाणिज्यिकरण में सहायक हो।

एसोचैम ने कहा, “सार्वजनिक क्षेत्र को अपनी विभिन्न योजनाओं (डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया) के साथ उन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए, जहां एआई, रोबोटिक्स का उपयोग पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ उसे प्रभावोत्पादक व दक्ष बनाने में किया जा सकता है। इस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा नवाचार कार्य को दिशा-निर्देश प्रदान किया जाना चाहिए।”

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अध्ययन में कहा गया है कि एनालिटिक्स और एमएल के क्षेत्र में उच्च कौशल वाले युवाओं को समर्थ बनाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोलकर सरकार इस दिशा में उत्प्रेरक का काम कर सकती है। इससे दुनियाभर से डाटा चालित उद्यमी भार में अपने विशिष्ट केंद्र स्थापित करने के लिए आ सकते हैं।

एसोचैम ने कहा कि सहयोगात्क प्रयास और शैक्षणिक समुदाय, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी उद्योग जैसे एआई आधारित अनुसंधान के तीन स्तंभों के बीच जारी बातचीत को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।

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