
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पिछले महीने उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपनी रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के “शुद्धीकरण” के मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को एक विस्तृत पत्र लिखकर मांग की है कि वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस घटना में शामिल लोगों और संगठनों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दें।
2 सितंबर को लिखे अपने पत्र में खरगे ने जेपी नड्डा को राज्यसभा में दिए गए उनके उस आश्वासन की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया था।
क्या है पूरा मामला?
8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खरगे की एक जनसभा आयोजित हुई थी। रैली संपन्न होने के बाद, कुछ संगठनों द्वारा उस स्थल का तथाकथित ‘शुद्धीकरण’ किया गया। 13 अगस्त को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान खरगे ने भारी मन से इस मुद्दे को उठाते हुए इसे सीधे तौर पर ‘छुआछूत’ (Untouchability) की मानसिकता से जोड़ा था।
उस समय नड्डा ने सदन में खड़े होकर इस कृत्य की कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा था, “माननीय खरगे जी ने जो कहा है, वह वास्तव में एक बेहद दुखद विषय है। यह केवल कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं, बल्कि हम सभी के लिए खेदजनक है। भारतीय जनता पार्टी कभी भी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। मैं इसकी निंदा करता हूं, जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” राज्यसभा के सभापति ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया था।
24 दिन बाद भी एफआईआर नहीं
खरगे ने अपने पत्र में कड़ी नाराजगी और हैरानी जताते हुए कहा कि सदन में दिए गए स्पष्ट आश्वासन और घटना के 24 दिन बीत जाने के बाद भी इस घृणित कार्य को अंजाम देने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। खरगे ने इसे भारतीय संविधान की मूल भावना और मानवीय मूल्यों के सर्वथा विपरीत बताया।
महाड सत्याग्रह और बाबा साहेब का जिक्र
समाज में व्याप्त जातिवादी मानसिकता को रेखांकित करते हुए खरगे ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक ‘महाड सत्याग्रह’ का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जब बाबा साहेब ने महाड के तालाब से पानी पिया था, तब भी जातिवादी अहंकार से भरे लोगों ने 108 घड़े गोमूत्र और गोबर से मंत्रोच्चार के साथ उस तालाब का ‘शुद्धीकरण’ किया था। खरगे ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि केवल मंत्र पढ़ने या हवन करने से छुआछूत जैसा जातिवादी कृत्य कभी पवित्र नहीं हो सकता।
“यह करोड़ों लोगों के सम्मान का मुद्दा है”
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल उनका व्यक्तिगत अपमान या कांग्रेस अध्यक्ष पद का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों वंचित लोगों की भावनाओं से जुड़ा है जो हर दिन समाज में इस कड़वी सच्चाई और भेदभाव का सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक विशिष्ट मानसिकता का परिचायक है जो समाज के एक बड़े वर्ग को सीधे प्रभावित करती है।
अंत में, खरगे ने जेपी नड्डा से आग्रह किया कि वे राज्यसभा में दिए गए अपने वचनों का सम्मान करें और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को सख्त निर्देश दें ताकि रामलीला मैदान में ‘शुद्धीकरण’ का नाटक करने वालों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।



