
फाइबर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं तो सावधान रहें। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार गलत तरीके से फाइबर बढ़ाने से ब्लोटिंग, कब्ज या पेट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉ. सेठी एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेन्ड हैं तथा गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी में डबल बोर्ड-सर्टिफाइड हैं।
अधिकांश लोग रोजाना सिर्फ 15 ग्राम फाइबर लेते हैं, जबकि जरूरत 25-38 ग्राम की होती है। अचानक ज्यादा फाइबर लेने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।
फाइबर से जुड़ी 5 आम गलतियां
- पर्याप्त पानी बिना ज्यादा फाइबर लेना
फाइबर पानी सोखता है। पर्याप्त तरल न लेने पर ब्लोटिंग और कब्ज हो सकती है। - अचानक बहुत ज्यादा फाइबर बढ़ाना
लो-फाइबर डाइट से एकदम हाई-फाइबर पर जाना ठीक नहीं। हर कुछ दिनों में सिर्फ 5 ग्राम बढ़ाएं, ताकि आंत के बैक्टीरिया ढल सकें। - सारा फाइबर एक साथ लेना
पूरे दिन की मात्रा एक ही भोजन में न लें। भोजनों में बांटकर लें, ताकि पाचन तंत्र पर बोझ न पड़े। - गलत प्रकार का फाइबर चुनना
- घुलनशील फाइबर (ओट्स, साइलियम) पाचन धीमा करता है, डायरिया और कोलेस्ट्रॉल के लिए फायदेमंद।
- अघुलनशील फाइबर (गेहूं की भूसी, सब्जियों के छिलके) बल्क बढ़ाता है, कब्ज में मददगार।
अपने लक्षणों के अनुसार सही प्रकार चुनें।
- लक्षण बिगड़ने पर नजरअंदाज करना
फाइबर बढ़ाने के बाद अगर समस्याएं बढ़ें तो जबरदस्ती न करें। यह संकेत हो सकता है कि आपके पेट को अलग तरीके की जरूरत है।
निष्कर्ष
फाइबर बढ़ाना फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा हमेशा बेहतर नहीं। धीरे-धीरे बढ़ाएं, पर्याप्त पानी पिएं और सही प्रकार चुनें। इससे आंत आसानी से ढल जाएगी।




