
नई दिल्ली: मानसून गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए यह मौसम कई जोखिम भी लेकर आता है। नमी, उमस और पानी भरी सड़कें फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ा देती हैं। ऐसे में डायबिटिक फुट केयर बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि छोटी-सी चोट भी गंभीर संक्रमण में बदल सकती है।
मानसून में डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों की विशेष देखभाल करनी चाहिए। यहां कुछ सरल और प्रभावी टिप्स दिए गए हैं:
1. पैरों को साफ और सूखा रखें
घर पहुंचते ही पैरों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। खासकर उंगलियों के बीच की जगह को पूरी तरह सूखा लें। नमी फंगल इंफेक्शन (एथलीट फुट) का कारण बन सकती है।
2. कभी नंगे पैर न चलें
मानसून में घर के अंदर भी नम फर्श पर नंगे पैर न चलें। बाहर की सड़कों पर कीचड़, कांच के टुकड़े और बैक्टीरिया भरे पानी से बचाव के लिए हमेशा उचित जूते या चप्पल पहनें।
3. सही फुटवियर चुनें
पानी सोखने वाले कैनवास या बंद जूतों से बचें। वॉटर-रेजिस्टेंट और हल्के, खुली सैंडल या जूते पहनें जो जल्दी सूख जाएं। भीगे जूतों को पूरी तरह सूखने के बाद ही पहनें।
4. रोजाना पैरों की जांच करें
डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण पैरों में सेंसेशन कम हो जाता है। इसलिए रोजाना पैरों को अच्छी तरह जांचें। लालिमा, सूजन, घाव, छाले या रंग में बदलाव पर तुरंत ध्यान दें। अगर जरूरी हो तो शीशे की मदद लें।
5. सही तरीके से मॉइस्चराइजर लगाएं
मानसून में त्वचा सूख सकती है। मॉइस्चराइजर लगाएं, लेकिन उंगलियों के बीच कभी न लगाएं। ऊपर और नीचे के हिस्से पर ही क्रीम लगाएं।
6. ब्लड शुगर कंट्रोल रखें
उच्च ब्लड शुगर इम्यूनिटी कमजोर करता है और घाव भरने में देरी करता है। इसलिए शुगर लेवल को अच्छे नियंत्रण में रखना सबसे बेहतर बचाव है।
7. कोई समस्या दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करें
अगर पैरों में घाव, छाला, सूजन, पस, बदबू या दर्द हो तो घरेलू उपाय न करें। तुरंत डॉक्टर या पोडियाट्रिस्ट से संपर्क करें।
ये टिप्स अपनाकर डायबिटीज के मरीज मानसून में पैरों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से बच सकते हैं।



