
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह ग्राउंड में आयोजित ‘गोरखाली महिला हरितालिका तीज महोत्सव’ में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने गोरखाली समुदाय की महिलाओं को हरितालिका तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सराहना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की और कहा कि आने वाले समय में राज्य सरकार की ओर से हरितालिका तीज महोत्सव को सरकारी स्तर पर संरक्षण और सहयोग देकर और भी बड़े एवं भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा, जिससे लोक संस्कृति का संवर्धन हो सके।
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने पारिवारिक, सामाजिक और वैवाहिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों का नेपाल के साथ अटूट ‘रोटी और बेटी’ का संबंध रहा है। नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और जलप्रलय पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए सीएम धामी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत अपने पड़ोसी राष्ट्र के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। भारत सरकार लगातार राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग देकर मित्र देश की हर संभव मदद कर रही है।
अपने संबोधन में सीएम धामी ने महिला सशक्तिकरण को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बताया। उन्होंने सरकार की प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। साथ ही, राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करके महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को वैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर तीन लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं, जो राज्य के समग्र विकास का प्रमाण है।
गढ़ी कैंट में आयोजित इस रंगारंग उत्सव में गोरखाली समुदाय के लोगों ने भारी संख्या में भाग लिया और अपनी पारंपरिक वेशभूषा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ के प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस सफल आयोजन ने जहां पारंपरिक सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ किया, वहीं समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी सशक्त संदेश दिया।




