हमारे संत

आतंकवाद का एकमात्र निदान : अवचेतन की सफाई

आतंकवाद

आतंकवाद की घटना निश्चित रूप से उस सबसे जुड़ी है, जो समाज में हो रहा है। समाज बिखर रहा है। उसकी पुरानी व्यवस्था, अनुशासन, नैतिकता, धर्म सब कुछ गलत बुनियाद पर खड़ा मालूम होता है। लोगों की अंतरात्मा पर अब उसकी कोई पकड़ नहीं रही। आतंकवाद का मतलब इतना ही ...

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अपने हाथों को बनाएं उर्जा का केंद्र

ऊर्जा

किसी विशेष मुद्रा में होने पर आपकी ऊर्जा एक खास तरह से काम करने लगती है। मुद्रा हाथों की एक खास स्थिति है। योग में मुद्राएं आपके शरीर को एक खास तरीके से व्यवस्थित करने के लिए होती हैं। आपने देखा होगा कि शास्त्रीय नृत्य में भी अनेक तरह की ...

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ईश्वर वो शक्ति है जिसके कारण सब कुछ हो रहा

ईश्वर

तुम क्या कहोगे अगर एक लहर सागर के अस्तित्व पर सवाल करे? सागर है तभी तो लहर है। जिसके कारण तुम खड़े हो, तुम्हारा अस्तित्व है, तुम सोचते हो, समझते हो, साँस लेते हो, वही भगवान है। ईश्वर क्या है? ईश्वर आकाश में यां कैलाश पर्वत पर बैठा कोइ व्यक्ति ...

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जीवन में संतोष की तलाश करो : ओशो

संतोष

वह व्यक्ति जो स्वस्थ, निर्भार, निर्बोझ, ताजा, युवा, कुंआरा अनुभव करता है, वही समझ पाएगा कि संतोष क्या है। अन्यथा तो तुम कभी न समझ पाओगे कि संतोष क्या होता है-यह केवल एक शब्द बना रहेगा। संतोष का अर्थ हैः जो कुछ है सुंदर है यह अनुभूति कि जो कुछ ...

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तनाव-मुक्त जीवन की ओर बढ़ो

तनाव

जब तुम तनाव  में होते हो, तब तुम्हारो भौहें चढ़ जातीं हैं। जब तुम इस तरह त्योरी चढाते हो, तब तुम चेहरे की  ७२ नसें और माँस-पेश्यियाँ उपयोग में लाते हो। लेकिन जब तुम मुस्कुराते हो तब उन में से केवल ४ का उपयोग करते हो। अधिक कार्य का अर्थ ...

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भगवान कृष्ण को समझें ही नहीं, महसूस करें

कृष्ण

हम अक्सर कृष्ण की बात करते हैं। कभी सोचा है कि कृष्ण आखिर हैं कौन? कृष्ण एक बहुत नटखट बालक हैं। वह एक बांसुरी वादक हैं और बहुत अच्छा नाचते भी हैं। वह अपने दुश्मनों के लिए भयंकर योद्धा हैं। कृष्ण एक ऐसे अवतार हैं, जिनसे प्रेम करने वाले हर ...

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वैराग्‍य से मिलेंगे संसार के सारे सुख

वैराग्य

वैराग्य का आना स्वाभाविक है। उम्र बढ़ने के साथ, तुम्हारा मन स्वतः ही छोटी-छोटी बातों में नहीं अटकता है। जैसे बचपन में तुम्हें लौलीपॉप से लगाव था, पर वह लगाव स्कूल या कॉलेज आने पर स्वतः ही छूट गया। बड़े होने पर भी दोस्त तो रहते हैं पर उनके साथ ...

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भावनाएं पत्थर नहीं होतीं

प्रेम

आदमी के व्यक्तित्व के तीन तल हैं: उसका शरीर विज्ञान, उसका शरीर, उसका मनोविज्ञान, उसका मन और उसका अंतरतम या शाश्वत आत्मा। प्रेम इन तीनों तलों पर हो सकता है लेकिन उसकी गुणवत्ताएं अलग होंगी। शरीर के तल पर वह मात्र कामुकता होती है। तुम भले ही उसे प्रेम कहो ...

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प्रेम तीनों लोकों में व्‍याप्‍त है: मुरारी बापू

प्रेम

जब तक विकार है, विश्राम संभव ही नहीं। अविकार की भूमिका विश्राम का स्वरूप या कहें कि विश्राम की पहचान है। प्रेम ही इस भवसागर से पार उतारने वाला एकमात्र उपाय है। प्रेमी बैरागी होता है, जिससे आप प्रेम करते हैं, उस पर न्यौछावर हो जाते हैं। त्याग और वैराग्य ...

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आध्यात्मिक होने का अर्थ

आध्यात्मिक

  अगर तुम इस संसार के किसी भी काम को अपने हाथ में लेकर कर सकते हो, फिर तुम्हारे आध्यात्मिक होने की एक संभावना पैदा हो सकती है, अन्यथा नहीं। अगर तुम्हारे पास इस संसार के किसी भी काम को लेकर और अच्छी तरह से करने की शक्ति और साहस ...

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