प्रेरक प्रसंग

प्रेरक-प्रसंग: नजरिया बदलें, मिलेगी कामयाबी

नजरिया बदलें, मिलेगी कामयाबी

एक लड़के के मन में नई – नई बातों को जानने की जिज्ञासा रहती थी | वह हमेशा लोगों से कुछ न कुछ पूछता रहता था | वह जहाँ रहता था , वही पास में ही एक मास्टर जी भी रहते थे | एक दिन वह मास्टर जी के पास ...

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प्रेरक-प्रसंग: ये कहानी सिखाती है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

जिंदगी में किया गया कोई भी काम या मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। हम जितनी मेहनत करते है उसका प्रतिफल हमें किसी न किसी रूप में अवश्य मिलता है, यही सत्य है। फर्क केवल इतना है कि कुछ व्यक्ति इस बात पर विश्वास करते है कि “मेहनत कभी बेकार नहीं ...

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प्रेरक-प्रसंग: शक्ति ही जीवन, दुर्बलता ही मृत्यु

शक्ति ही जीवन, दुर्बलता ही मृत्यु

एक बहुत बड़े ठेकेदार के यहां हजारों मजदूर काम करते थे। एक बार उस क्षेत्र के मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर दी। महीनों हड़ताल चलती रही। नतीजतन मजदूर भूखे मरने लगे और रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरी बस्तियों में चले गए, लेकिन दूसरी बस्तियों के गरीब मजदूर ...

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प्रेरक-प्रसंग : बुद्धि का बल

बुद्धि का बल

विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक सुकरात एक बार अपने शिष्यों के साथ बैठे कुछ चर्चा कर रहे थे। तभी वहां एक ज्योतिषी आ पहुंचा। वह सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए बोला, “मैं ज्ञानी हूँ ,मैं किसी का चेहरा देखकर उसका चरित्र बता सकता हूँ। बताओ तुममें ...

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प्रेरक-प्रसंग: गुरु धर्म सबसे बड़ा

गुरु धर्म सबसे बड़ा

एक नवदीक्षित शिष्य ने अपने गुरु के साथ कुछ दिन व्यतीत करने के बाद एक दिन पूछा-  गुरुदेव, मेरा भी मन करता है कि आपकी ही तरह मेरे भी कई शिष्य हों और सभी मुझे भी  आप जैसा ही मान-सम्मान दे। गुरु ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए कहा- कई वर्षों की ...

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प्रेरक-प्रसंग: सच्चा प्यार

सच्चा प्यार

एक बार की बात है कि एक लड़की ने एक बुजुर्ग से पूछा कि मैंने सुना है कि सच्चा प्यार कम ही लोगों को नसीब होता है। ऐसा क्यों होता है? क्या यह बात सच है? बुजुर्ग ने कहा कि मैं बताता हूं, लेकिन पहले तुम एक काम करो। कल ...

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प्रेरक-प्रसंग: अगर आपके विचार भी नहीं छिपते तो ये कहानी आप ही के लिए है

प्रेरक-प्रसंग

महाभारत के समय की बात है। पांडव स्वयंवर में दी गई शर्त को जीत चुके थे। शर्त के अनुसार द्रौपदी स्वयंवर अर्जुन के साथ हो गया। इसके बाद पांडव द्रौपदी को साथ लेकर अपनी कुटिया में आ गए। पांडव उस समय अज्ञातवास में थे। एक ब्रह्माण द्वारा स्वयंवर में विजयी ...

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प्रेरक प्रसंग : श्रम का पुरस्कार

श्रम का पुरस्कार

बहुत दिनों पहले की बात है, गिलहरी पूरी तरह काली हुआ करती थी। छोटी-छोटी झाड़ियों के बीच, घास के मैदानों में, ऊँचे बड़े पेड़ों पर रेंगती फिरती कूदती फाँदती लेकिन लोग उसे सुंदर प्राणी नहीं समझते थे। गिलहरी को गाँव के परिवारों के साथ रहना पसंद था लेकिन गाँव वाले ...

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प्रेरक-प्रसंग : दिमाग से बड़ा तजुर्बा

दिमाग से बड़ा तजुर्बा

यह जापान में प्रबंधन के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाने वाला बहुत पुराना किस्सा है जिसे ‘साबुन के खाली डिब्बे का किस्सा’ कहते हैं। कई दशक पहले जापान में साबुन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी को अपने एक ग्राहक से यह शिकायत मिली कि उसने साबुन का व्होल-सैल पैक खरीदा था ...

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प्रेरक-प्रसंग : सहनशीलता

सहनशीलता

एक दरोगा संत दादू की ईश्वर भक्ति और सिद्धि से बहुत प्रभावित था। उन्हें गुरु मानने की इच्छा से वह उनकी खोज में निकल पड़ा। लगभग आधा जंगल पार करने के बाद दरोगा को केवल धोती पहने एक साधारण-सा व्यक्ति दिखाई दिया। वह उसके पास जाकर बोला, “क्यों बे तुझे ...

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