
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है, जहां कर चोरी और धोखाधड़ी के उद्देश्य से एक फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया गया है। इस पूरे मामले में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के साथ करीब 87 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसके तहत इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले दो आरोपियों को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया है। पकड़े गए इन आरोपियों की पहचान पुष्पेंद्र और ओम सिंह के रूप में की गई है, जो इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
पुलिस की प्रारंभिक जांच और मिली जानकारी के अनुसार, इन शातिर आरोपियों ने ‘पीएस ट्रेडर्स’ के नाम से कागजों पर एक पूरी तरह से फर्जी फर्म खड़ी की थी। इसी छद्म कंपनी की आड़ में वे बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार का दिखावा कर रहे थे और टैक्स चोरी कर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे थे।
जैसे ही इस लाखों के फर्जीवाड़े की भनक प्रशासन को लगी, पुलिस और एसआईटी ने बिना समय गंवाए मामले की गहन जांच शुरू कर दी। जांच दल ने सतर्कता से काम करते हुए आरोपियों की हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी और उस फर्जी कंपनी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सुराग व सबूत इकट्ठा किए। ठोस साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए जाल बिछाया।
सटीक सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए प्रेमनगर थाना पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम ने धरमपुर चौराहे के पास से पुष्पेंद्र और ओम सिंह को धर दबोचा। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में अहम कड़ी साबित होगी। फिलहाल, पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस फर्जी जीएसटी फर्म के जरिए अब तक कुल कितना और किस तरह का कारोबार किया गया था।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस सुनियोजित अपराध में क्या कुछ और सफेदपोश लोग भी शामिल हैं जो पर्दे के पीछे से इस गिरोह का साथ दे रहे थे। मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्यवाही जारी है और पुलिस जब्त किए गए दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है ताकि पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।



