योगी की पुलिस का एक औऱ शर्मनाक कारनामा, न्याय मांगने पर ग्रामीणों में पैदा कर रही डर

रिपोर्ट- अखिलेश्वर तिवारी

बलरामपुर में पुलिस के उत्पीड़न से एक पूरा गाँव दहशत में है। पुलिस के आतंक से गाँव के पुरुष सदस्य गाँव छोड़कर फरार हो गये है। महराजगंज तराई थानाक्षेत्र के साहिबपुर गाँव में एक पुलिसकर्मी के घायल होने के बाद पुलिस का तांडव देखने को मिल रहा है।

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कहावत है कि खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे। अपने ही करतूत से खिसियाई बलरामपुर पुलिस के निशाने पर अब ग्रामीण है। महराजगंज तराई थाना क्षेत्र के साहिबपुर में लडकी भगाने के आरोप में दो पक्षो में कई दिनो से तनातनी चल रही थी। इस मामले में पुलिस की भूमिका शुरु से ही संदिग्ध नजर आयी और पुलिस पर एकपक्षीय कार्यवाई करने के आरोप लगने लगे। इसी मामले को लेकर 25 सितम्बर को दोनो पक्षो में विवाद शुरु हुआ।

सूचना पर पुलिस के कर्मचारी बिना वर्दी के पहुँच गये। इसी मारपीट में पुलिस का एक सिपाही भी घायल हो गया। इसके बाद शुरु हुआ पुलिस का तांडव। पुलिस ने गाँव में पहुँचकर जमकर उत्पात मचाया। गाँव के कई पुरुष सदस्य को पुलिस थाने ले गयी तो कई सदस्य डर के कारण गाँव छोडकर चले गये। पुलिस के गुस्से का शिकार महिलाएं भी बनी। पुलिस कर्मियों ने महिलाओ की भी जमकर पिटाई की।

पीड़िता गिरिराज कुमारी का आरोप है कि गाँव के दबंग उसकी लड़की को भगाकर ले गये। पुलिस भी उन्ही दबंगो का साथ देती रही जिसके कारण दबंग उनके परिवार को ताने मारने लगे थे। इसी को लेकर दोनो पक्षो में विवाद हुआ। विवाद में पहुँचे पुलिस कर्मी के घायल होने के बाद गिरिराज के बेटे की तलाश में पुलिस अपना तांडव दिखा रही है। जब इस मामले में एसपी से बात की गयी तो उन्होने कहा कि अपराधियों की धरपकड़ के लिये दबिश दी जा रही है लेकिन किसी को अकारण परेशान नही किया जायेगा।

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लेकिन इस पूरे मामले में स्थानीय थाने के पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है जिसको लेकर लोगो में काफी आक्रोश है। इस मामले को लेकर यदि पुलिस शुरु से संवेदनशील रही होती तो इस घटना को रोका जा सकता था।

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