राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में अखिलेश यादव की एंट्री, बिहार में इंडिया गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं और 65 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने के विरोध में शुरू हुई वोटर अधिकार यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

शनिवार, 30 अगस्त 2025 को इस यात्रा में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शामिल हुए। यात्रा के 14वें दिन, सारण जिले के एकमा से शुरू होकर यह आरा (भोजपुर) पहुंची, जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन हुआ।

इस दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव, विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश साहनी, और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य एक ही जीप पर सवार होकर जनता के बीच पहुंचे, जिसने इंडिया गठबंधन की एकजुटता का मजबूत संदेश दिया।

अखिलेश यादव का बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमला

आरा के वीर कुंवर सिंह मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बीजेपी, चुनाव आयोग और अधिकारियों की ‘घपला तिकड़ी’ वोटों की डकैती कर रही है। यह तिकड़ी देश का वर्तमान और भविष्य बिगाड़ रही है।” अखिलेश ने बीजेपी पर भोले-भाले समर्थकों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी साम्प्रदायिकता की आड़ में भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए झूठ और दुष्प्रचार का सहारा लेती है। उन्होंने पढ़े-लिखे लोगों से अपील की कि वे बीजेपी के नफरत भरे प्रचार और व्हाट्सएप मैसेजों से सावधान रहें, जो लोगों के विवेक को बंधक बनाने का काम करते हैं।

यात्रा का उद्देश्य और प्रभाव

वोटर अधिकार यात्रा, जो 17 अगस्त 2025 को सासाराम से शुरू हुई थी, का मकसद बिहार में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के तहत वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं और 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना है। राहुल गांधी ने इसे “वोट चोरी” का प्रयास बताते हुए कहा कि यह संविधान पर हमला है, क्योंकि संविधान प्रत्येक नागरिक को वोट का अधिकार देता है। यात्रा 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 20 से अधिक जिलों से गुजरी है और 1 सितंबर 2025 को पटना में एक पैदल मार्च के साथ समाप्त होगी।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने अखिलेश यादव के शामिल होने पर खुशी जताते हुए इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक आंदोलन बताया। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव बीजेपी के लोकतंत्र विरोधी रवैये के खिलाफ हमेशा मजबूत सहयोगी रहे हैं और गरीबों व वंचितों की आवाज उठाते रहे हैं।” आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने भी कहा कि इस यात्रा ने बिहार की जनता को सड़कों पर ला दिया है और पटना से दिल्ली तक सरकार को जगाने का काम किया है।

यात्रा का मार्ग और नेताओं की भागीदारी

शनिवार को यात्रा एकमा (सारण) से शुरू होकर एकारी, माने, बेलदारी, और दाउदपुर होते हुए छपरा म्युनिसिपल ग्राउंड पर पहुंची, जहां जनसभा हुई। इसके बाद यह आरा पहुंची। यात्रा में प्रियंका गांधी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य जैसे इंडिया गठबंधन के दिग्गज नेता भी अलग-अलग चरणों में शामिल हुए। यात्रा का समापन पटना में होगा, जहां प्रशासन ने गांधी मैदान में रैली की अनुमति नहीं दी, जिसके चलते गठबंधन ने पैदल मार्च का फैसला किया।

बीजेपी और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

बीजेपी ने यात्रा के दौरान दिए गए बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी और आरजेडी नेता विकास के मुद्दों पर बात करने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पिछले दो दशकों से सभी राजनीतिक दल वोटर लिस्ट में सुधार की मांग करते रहे हैं, और SIR इसी का हिस्सा है।

वोटर अधिकार यात्रा ने बिहार में मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। अखिलेश यादव की भागीदारी ने इंडिया गठबंधन की एकता को और मजबूत किया है, जो आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी-नीत एनडीए को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है।

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