उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ में उफान पर गोमती नदी, इकाना स्टेडियम से लेकर शहीद पथ तक पहुंचा बाढ़ का पानी, जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात चिंताजनक हो गए हैं। नदी के उफान पर होने के कारण बाढ़ का पानी शहर के कई प्रमुख और व्यस्त इलाकों तक पहुंच गया है। विशेष रूप से गोमती नगर विस्तार और शहीद पथ के आसपास का क्षेत्र इस जलभराव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फीनिक्स पलासियो मॉल के ठीक सामने स्थित शहीद पथ की सर्विस लेन पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर इस सर्विस लेन पर बैरिकेडिंग कर दी है और आवागमन को पूरी तरह से रोक दिया है ताकि लोग बाढ़ के पानी में न फंसें। गौरतलब है कि इसी मार्ग से होकर उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यालय तक भी जाया जाता है, जो अब जलभराव की चपेट में है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार शाम छह बजे तक गोमती नदी का जलस्तर 107.24 मीटर दर्ज किया गया था। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह स्तर अभी भी चेतावनी के निशान से 1.26 मीटर नीचे है, लेकिन नदी के फैलाव ने शहरी क्षेत्रों में मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं।

जलभराव के कारण शहीद पथ की सर्विस लेन पर यातायात को रोक दिया गया है और पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों के रूट को डायवर्ट कर दिया है। जलभराव का सीधा असर फीनिक्स पलासियो मॉल पर भी देखने को मिल रहा है, जहां रास्तों में पानी भर जाने की वजह से लोगों और ग्राहकों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है।

बाढ़ का यह पानी गोमती नगर विस्तार के साथ-साथ भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के बाहरी परिसर तक भी पहुंच गया है। यह वही स्टेडियम है जहां मंगलवार की रात ही भारत और वेस्टइंडीज के बीच पहला टी-20 क्रिकेट मैच बेहद धूमधाम से खेला गया था, लेकिन मैच के अगले ही दिन यह पूरा इलाका बाढ़ के पानी से घिर गया। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम और अन्य संबंधित विभाग जल निकासी व राहत कार्यों में युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं।

प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए पानी के करीब 20 टैंकर और 10 हजार लीटर पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की है। इसके अलावा, बाढ़ से विस्थापित हुए परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं और राहत व बचाव कार्यों को तेजी से चलाने के लिए 90 नौकाओं को तैनात किया गया है।

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