सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूरे करने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने एक बार फिर से ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का बड़ा संकल्प दोहराया है। ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को एक पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र बनाने के अपने विजन को मजबूती से रखा।
इस दौरान उन्होंने पूरे उत्साह और दृढ़ विश्वास के साथ “हम करके रहेंगे… वी विल डू इट (We Will Do It)” का नारा बुलंद किया, जिसे वहां मौजूद भारी जनसमूह ने भी पूरे जोश के साथ दोहराया। यह अवसर न केवल उनके राजनीतिक सफर का एक बड़ा मील का पत्थर था, बल्कि भविष्य के भारत की रूपरेखा पेश करने का भी एक अहम मंच साबित हुआ।
अपने 25 साल के सुदीर्घ राजनीतिक सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भावुक नजर आए। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 के उस दिन का विशेष रूप से उल्लेख किया जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस वक्त उन्होंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 साल सेवा करने का यह अहम पड़ाव उनके जीवन में आएगा।
इस अभूतपूर्व उपलब्धि का पूरा श्रेय उन्होंने देश की जनता के निरंतर मिल रहे आशीर्वाद और विश्वास को दिया। मोदी ने कहा कि पिछले ढाई दशकों में कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव हुए, लेकिन जनता ने उन पर अपना भरोसा कायम रखा और निरंतर सेवा का अवसर प्रदान किया।
अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन की सीख साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके जीवन में घटी कोई भी घटना व्यर्थ नहीं गई है। उन्होंने बहुत ही दार्शनिक अंदाज में बताया कि जिस चीज ने उन्हें जीत दिलाई, उसने विनम्र रहना सिखाया और जिस चीज ने उन्हें गिराया, उसने फिर से खड़ा होने का साहस दिया। शुभचिंतकों के प्रोत्साहन और आलोचकों द्वारा दिए गए आत्म-निरीक्षण के मौकों को उन्होंने अपनी सफलता की सीढ़ी बताया।
हर संकट को अपने धैर्य की परीक्षा और हर सफलता को अपनी बढ़ती जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने देश के लोकतंत्र, भारतीय संविधान, अपनी पार्टी भाजपा, एनडीए गठबंधन और सभी राजनीतिक सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘सेवा ज्योति यात्रा’ में शामिल सभी लोगों का भी विशेष अभिनंदन किया।
अपने इस विशेष दिन की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने आध्यात्मिक तरीके से की। उन्होंने बताया कि सुबह वह दिल्ली स्थित श्री विनायक मंदिर गए थे, जहां उन्होंने 140 करोड़ भारतवासियों के उज्ज्वल भविष्य और कल्याण के लिए प्रार्थना की। उन्होंने ईश्वर से स्वयं के लिए बस इतनी शक्ति और सामर्थ्य मांगी कि वह देश की सेवा में अपनी ऊर्जा का और अधिक संचार कर सकें।
अंत में, उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि 25 साल का यह सफर भले ही संतोष और कृतज्ञता का अवसर है, लेकिन उनकी निगाहें अब पूरी तरह से 2047 के उस बड़े लक्ष्य पर केंद्रित हैं, जहां भारत को हर हाल में आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है।


