
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव को लेकर नामांकन पत्रों की संवीक्षा (जांच) के बाद चुनावी परिदृश्य पूरी तरह स्पष्ट हो गया है। निर्वाचन आयोग द्वारा दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल के उपरांत दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए हैं।
पर्चा खारिज होने वाले उम्मीदवारों में तेलंगाना के निवासी कांते सायन्ना और राजधानी लखनऊ के ओमकार नाथ चौरसिया शामिल हैं। इन दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के दौड़ से बाहर होते ही अब चुनावी मुकाबले में किसी भी तरह की वोटिंग की संभावना समाप्त हो गई है और सभी दस सीटों पर प्रत्याशियों की जीत का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे रद्द होने का मुख्य कारण निर्वाचन से जुड़ी अनिवार्य वैधानिक अर्हता का पूरा न होना रहा। नियमानुसार, राज्यसभा चुनाव में पर्चा दाखिल करने के लिए किसी भी उम्मीदवार के पास कम से कम दस विधायकों का प्रस्तावक के रूप में समर्थन होना अनिवार्य होता है।
चूंकि दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के पास जरूरी संख्या बल नहीं था, इसलिए उन्होंने बिना किसी प्रस्तावक के नाम के ही अपने नामांकन पत्र जमा कर दिए थे। नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान निर्वाचन अधिकारी अजीत कुमार वर्मा ने नियमावली का उल्लंघन और प्रस्तावकों का अभाव पाते हुए दोनों नामांकन पत्रों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
इन दोनों नामांकन पत्रों के खारिज होने के बाद अब उत्तर प्रदेश की दस राज्यसभा सीटों के लिए मैदान में केवल दस प्रत्याशी ही शेष बचे हैं। इन प्रत्याशियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के दो अधिकृत उम्मीदवार शामिल हैं। सीटों और प्रत्याशियों की संख्या एक समान होने के कारण अब मतदान की नौबत नहीं आएगी और सभी दस प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय हो चुका है। तय चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख है।
इस निर्धारित समयावधि के समाप्त होने और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही निर्वाचन अधिकारी द्वारा सभी दस प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।



