
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास पर हरियाणा से आए युवाओं के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह युवा समूह उत्तराखंड के तीन दिवसीय भ्रमण पर था। इस दौरान युवाओं ने मुख्यमंत्री के साथ अपने यात्रा अनुभवों को विस्तार से साझा किया और राज्य की प्राकृतिक सुंदरता व विकास कार्यों को करीब से जानने का अवसर प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री धामी ने इन युवाओं का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि ‘अतिथि देवो भव’ की महान परंपरा देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने अंतर-राज्यीय युवा विनिमय कार्यक्रमों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे दौरों से युवाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को समझने, विभिन्न राज्यों में हो रहे नवाचारों को देखने और विकास की प्रभावी नीतियों को सीखने का बेहतरीन मौका मिलता है, जिससे विचारों के सकारात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है।
अपने इस भ्रमण के दौरान हरियाणा के इन युवाओं ने उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाओं और मजबूत होते बुनियादी ढांचे की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से राज्य में बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन को बढ़ावा देने, होमस्टे योजना, सौर ऊर्जा और सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।
युवाओं का मानना था कि इस यात्रा ने उन्हें उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों को गहराई से देखने और स्थानीय समुदायों के जीवन पर सरकारी कार्यक्रमों के सीधे प्रभाव को समझने का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य और खुशी व्यक्त की कि अत्यंत दुर्गम और पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, राज्य में सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। इसके साथ ही रेलवे नेटवर्क के हो रहे तेज विस्तार और राज्य के स्वच्छ पर्यावरण व शुद्ध आबोहवा ने भी युवाओं का मन मोह लिया।
युवाओं के इस समूह ने राज्य में होमस्टे को दिए जा रहे प्रोत्साहन और इस क्षेत्र में मिल रहे सरकारी समर्थन की विशेष रूप से चर्चा की। उनका कहना था कि इस पहल से स्थानीय निवासियों के लिए स्वरोजगार के बेहतरीन नए अवसर पैदा हुए हैं। इसके अतिरिक्त, युवाओं ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों को भी सराहा। उन्होंने महसूस किया कि बेहतर कनेक्टिविटी और पर्यटन सुविधाओं के कारण ही उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के सर्वथा अनुकूल मानी जा रही ‘रूफटॉप सोलर योजना’ (छत पर सौर ऊर्जा) को भी युवाओं ने बेहद प्रासंगिक कदम बताया। स्थानीय लोगों के शांत स्वभाव और उनके आतिथ्य सत्कार की दिल खोलकर प्रशंसा करते हुए युवाओं ने स्वीकार किया कि इस यात्रा से उन्हें यह प्रत्यक्ष रूप से समझ आ गया है कि आखिर उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ क्यों कहा जाता है।
युवाओं के उत्साह को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धताओं को भी उनके सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य विकास का लाभ समाज के सबसे हाशिए पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। ‘अंत्योदय’ की भावना के अनुरूप, राज्य में गरीबों, महिलाओं, युवाओं, किसानों और समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए कई योजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं।
रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी भर्तियों में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है और बीते लगभग पांच वर्षों में 35,000 से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है।
विकास और विरासत को एक साथ लेकर चलने के सरकार के विजन को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ ही महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उत्पादों, मोटे अनाज (मिलेट्स), हस्तशिल्प और सीमांत क्षेत्रों के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। बातचीत के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने इन युवाओं को “उत्तराखंड का डिजिटल ब्रांड एंबेसडर” करार दिया।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी इस यात्रा के सुखद अनुभवों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दोस्तों और बड़े पैमाने पर आम लोगों के साथ साझा करें। मुख्यमंत्री ने उनसे अपील की कि वे हरियाणा लौटकर वहां के युवाओं को उत्तराखंड की संस्कृति, पर्यटन, तीर्थयात्रा, महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों और यहां की खूबियों के बारे में बताएं, ताकि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक, पर्यटन और नवाचार से जुड़े संबंधों को और भी अधिक मजबूती मिल सके।




