
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक बेहद अजीबोगरीब और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। जिले में एक ऐसी महिला अपने घर वापस लौट आई है, जिसे उसके परिजनों ने करीब पांच साल पहले मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।
महिला के जीवित वापस लौटने के बाद अब वर्ष 2021 में पुलिस और परिवार द्वारा की गई शव की शिनाख्त पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, और यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनौली थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव की रहने वाली इशरावती मानसिक रूप से विक्षिप्त थीं और साल 2021 में अचानक अपने घर से लापता हो गई थीं। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। कुछ दिनों बाद पुलिस को एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ। परिवार के लोगों ने उस शव के पास मिली चप्पल और कपड़ों के आधार पर यह मान लिया कि वह शव किसी और का नहीं बल्कि इशरावती का ही है।
दुख और सदमें में डूबे परिवार ने उस अज्ञात शव को इशरावती समझकर पूरे विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। परिजनों को यह विश्वास हो गया था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं रही है। लेकिन, कुदरत का खेल देखिए कि करीब पांच साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद इशरावती मुंबई की एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) की मदद से अचानक सही-सलामत अपने घर पहुंच गईं। पांच साल से जिसे मृत समझकर भुला दिया गया था, उसे अचानक जीवित अपने सामने देखकर परिवार के सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, साथ ही वे हक्के-बक्के भी रह गए।
पुलिस और प्रशासन के सामने खड़े हुए बड़े सवाल
इस अनोखी घटना के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि यदि इशरावती जिंदा थीं और मुंबई पहुंच गईं, तो फिर वर्ष 2021 में जिस महिला के शव का अंतिम संस्कार कैथवलिया के परिजनों ने किया था, वह असल में कौन थी? पुलिस और प्रशासन के लिए यह जांच का गंभीर विषय बन गया है कि पांच साल पहले बरामद किए गए उस अज्ञात शव की वास्तविक पहचान क्या थी और किन परिस्थितियों में उसकी शिनाख्त में इतनी बड़ी भूल हुई थी। इसके अलावा, पिछले पांच वर्षों तक इशरावती कहां रहीं और किन हालातों में मुंबई पहुंचीं, पुलिस इन तमाम पहलुओं की गहराई से छानबीन करने में जुट गई है।



