
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले और इसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और विभिन्न बैराजों से छोड़े जा रहे पानी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गंगा, रामगंगा, गर्रा और खन्नौत जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण जिले के कई तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे गंभीर हालात उत्पन्न हो गए हैं।
कलान तहसील क्षेत्र में गंगा नदी पूरे उफान पर है, जिसके चलते शमसाबाद-ढाई घाट मुख्य मार्ग पर करीब दो फुट तक पानी बहने लगा है। सड़क पर पानी का बहाव इतना तेज है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। मार्ग बाधित होने के कारण दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है, इसके बावजूद कुछ लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर इस जलमग्न रास्ते को पार करने का प्रयास कर रहे हैं।
गंगा के रौद्र रूप का व्यापक असर मिर्जापुर क्षेत्र में भी साफ देखने को मिल रहा है। यहां जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे का एक बड़ा हिस्सा चौरा गांव के पास फिर से पानी में डूब गया है। लगभग सौ मीटर के लंबे दायरे में एक फुट से अधिक गहरा पानी बह रहा है। इसके साथ ही, चौरा-बसोला नगला संपर्क मार्ग और पैलानी उत्तरी को इस्लामनगर व अन्य गांवों से जोड़ने वाले कई रास्ते भी पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। खेतों में पानी भर जाने से किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें डूब गई हैं और पशुपालकों के सामने मवेशियों के लिए चारे का भारी संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय एसडीएम के अनुसार, बारिश के कारण यह जलभराव हुआ है और एक-दो दिन में हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नदियों के उफान के साथ-साथ तेज बहाव के कारण हो रहा कृषि भूमि का कटान किसानों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी बन गया है। जलालाबाद और अल्हागंज क्षेत्र में रामगंगा और बहगुल नदियों ने भारी तबाही मचाई है। तटवर्ती करीब एक दर्जन गांवों में नदियां तेजी से उपजाऊ जमीन काट रही हैं। रामपुर, भरतौली, कसारी, ठिंगरी, कोठामंझा, दौलतियापुर और चुन्नी की मड़ैया जैसे गांवों के किसानों की रातों की नींद उड़ी हुई है।
इन क्षेत्रों में सैकड़ों बीघा कृषि भूमि, तैयार फसलें, बड़े-बड़े पेड़ और किसानों के ट्यूबवेल बोरिंग नदी की तेज धार में समा चुके हैं। अकेले ठिंगरी और आसपास के गांवों में लगभग एक हजार बीघा जमीन कट चुकी है। ग्रामीणों में भारी दहशत है क्योंकि कटान इतनी तेज है कि नदी हर दिन दो से तीन मीटर आगे बढ़ रही है और अब यह रिहायशी आबादी से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर रह गई है।
हालात की गंभीरता और कटान से हो रहे भारी नुकसान की खबरें सामने आने के बाद जिला प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अरविंद सिंह ने अन्य विभागीय अधिकारियों और स्थानीय विधायक के साथ कटान प्रभावित कसारी गांव का सघन दौरा किया। उन्होंने कोलाघाट पुल के पास कट चुकी सैकड़ों बीघा जमीन का जायजा लिया और अधीनस्थ अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के सख्त निर्देश दिए।
उपजिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे तटवर्ती गांवों पर पैनी नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करें। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए शरणालय स्थापित किए जा रहे हैं और आवागमन व राहत कार्यों के लिए पर्याप्त नावों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।



