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शाहजहांपुर: बिजली के खंभे के सपोर्टिंग तार में उतरे करंट से 8 वर्षीय मासूम की मौत, बेबस परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के खुदागंज क्षेत्र में एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां मजरा खेड़ा मझखेड़ा गांव में शनिवार सुबह बिजली के खंभे के सपोर्टिंग तार में करंट उतरने से 8 वर्षीय मासूम राधिका की दर्दनाक मौत हो गई। राधिका सुबह के समय पास की दुकान पर कुछ सामान लेने जा रही थी, तभी वह इस जानलेवा तार की चपेट में आ गई।

बुरी तरह झुलसी बच्ची को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) विदुष सक्सेना के निर्देश पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

इस अप्रत्याशित हादसे ने राधिका के परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है, जो पहले से ही घोर आर्थिक तंगी और दुखों से जूझ रहा है। बच्ची के पिता अजयवीर सिंह साल 2024 की शुरुआत में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और बाइक की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके पैर के अब तक नौ ऑपरेशन हो चुके हैं और वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं।

परिवार के पास आजीविका के नाम पर मात्र एक बीघा जमीन है और अजयवीर का इलाज भी गांव वालों द्वारा जुटाए गए चंदे से चल रहा है। इस विपन्नता के बीच बेटी को खोने के बाद पिता अजयवीर और मां बिशुना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। माता-पिता को विलाप करता देख राधिका का एक साल का छोटा भाई भी बिलख रहा है। लाचारी का आलम यह है कि यह बेबस परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की स्थिति में भी नहीं है।

एक ओर जहां परिवार मातम में डूबा है, वहीं विद्युत निगम के अधिकारियों के बयानों में भारी विरोधाभास नजर आ रहा है। विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इसके विपरीत, क्षेत्रीय उपखंड अधिकारी (एसडीओ) धर्मेंद्र सिंह ने कंक्रीट के खंभे या उसके सपोर्टिंग तार में करंट आने की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। एसडीओ का दावा है कि उन्होंने कर्मचारियों की टीम भेजकर खंभे की जांच कराई थी। कर्मचारियों ने खंभे के पास पानी डालकर भी देखा, लेकिन किसी को करंट महसूस नहीं हुआ। एसडीओ का तर्क है कि कंक्रीट के खंभे में करंट नहीं उतर सकता और बच्ची की मौत यकीनन किसी अन्य स्रोत से करंट लगने के कारण हुई होगी।

जिले में बिजली के खंभों और उनके सपोर्टिंग तारों में करंट उतरने से मौतों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह के हादसों की एक लंबी और भयावह फेहरिस्त है, जो विभागीय दावों की पोल खोलती है। बीते 20 अगस्त को मीरानपुर कटरा के मोहल्ला बंगशान स्थित रामनगर कॉलोनी में सीमेंटेड खंभे के सपोर्ट तार में करंट आने से आठ वर्षीय असद की जान चली गई थी। इससे पहले 14 जून को मिर्जापुर के नई बस्ती भौती गांव में संगीता और 23 जून को कांट के मोहल्ला मरहैया रहमतपुर में पांच वर्षीय अमान की भी इसी तरह सपोर्ट तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हुई थी। इसके अलावा 22 मार्च को बंडा के रामदेवरी गांव में खेत में गिरे तार के करंट से ब्रजेश नाम के व्यक्ति ने अपनी जान गंवाई थी।

लगातार हो रहे इन हादसों के बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

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