
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को अध्यक्ष सतीश महाना सदन में हुए हंगामे पर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन अंतिम चरण में है और अब उन्हें गंभीरता से सोचना होगा कि वे विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी के योग्य हैं या नहीं।
महाना ने मंगलवार के हंगामे पर पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “मेरे मन में पीड़ा है। पहली बार लगा कि या तो हमारे प्रयास में कमी रह गई या फिर डॉ. भीमराव आंबेडकर की बात सही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में होती है।” उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने के प्रयासों का जिक्र करते हुए आत्ममंथन की बात कही।
सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
लगातार हंगामे के बीच कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के पास हो गए। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की मांग की, जिस पर अध्यक्ष ने सहमति दे दी।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बयान
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं किया। उन्होंने कहा कि सपा सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बोलने का अवसर तक नहीं दिया और उनका मकसद सिर्फ सदन का समय बर्बाद करना है।
सपा विधायक का निलंबन और धरना
मंगलवार को मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान हंगामे में सपा विधायक सचिन यादव को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद वे विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। सपा विधायकों ने आरोप लगाया कि वे ‘दान चोरी’ और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं, लेकिन सरकार तैयार नहीं है।
विपक्ष ने शिक्षक भर्ती और राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर परिसर में प्रदर्शन जारी रखा।


