
सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की हत्या और घरेलू क्रूरता के एक मामले में आरोपी पति की सजा को बरकरार रखते हुए समाज की मानसिकता पर करारी फटकार लगाई है।
कोर्ट ने कहा कि हमारे समाज और परिवारों में शादीशुदा बेटियों की गंभीर परेशानियों, दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा की शिकायतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अदालत ने इस घटनाक्रम को “सामाजिक विफलता” करार दिया।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब कोई महिला अपने साथ हो रही क्रूरता के खिलाफ आवाज उठाती है, तो उसे सुरक्षा देने की बजाय चुप रहने और समझौता करने का दबाव बनाया जाता है। कोर्ट ने कहा कि परिवार और समाज की यही संवेदनहीनता कई बार महिलाओं की जान ले लेती है।




