
केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्या सभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर भारत का स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता की हितों को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यह संकट ऊर्जा आपूर्ति, शिपिंग मार्गों और वैश्विक व्यापार में गंभीर व्यवधान पैदा कर सकता है।
जयशंकर ने बताया कि क्षेत्र में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। सरकार 20 फरवरी से ही सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। पश्चिम एशिया की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
मंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी बात की। उन्होंने बताया कि बढ़ते तनाव के बीच अब तक 67 हजार से ज्यादा भारतीय सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। सरकार क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की भलाई को लगातार प्राथमिकता दे रही है।
जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति का जिक्र किया। ईरान की अनुरोध पर 1 मार्च को मंजूरी दी गई और जहाज 4 मार्च को पहुंचा। उन्होंने कहा कि यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया, क्योंकि जहाज में तकनीकी खराबी थी और उसमें ज्यादातर युवा कैडेट सवार थे।
उन्होंने 4 मार्च को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डूबाए गए ईरानी जहाज आईआरआईएस देना की घटना को दुखद बताया। भारत ने खोज और बचाव अभियान में अपनी नौसेना और विमान तैनात किए थे। जयशंकर ने दोहराया कि भारत संयम और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है ताकि स्थिति और बिगड़े नहीं।



