
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले विवादित अंश पर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है। यह न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा, “किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा।” अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताने का नोटिस जारी किया और पूछा कि इसे अवमानना क्यों न माना जाए।
एनसीईआरटी ने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि विवादित अंश हटा दिया जाएगा तथा ऑनलाइन प्रतियां तुरंत हटाई जाएंगी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि केवल माफी और हटाना काफी नहीं, यह सोच-समझकर किया गया कदम लगता है।
24 फरवरी को जारी हुई नई किताब में इस अध्याय के कारण विवाद हुआ था। इसके बाद एनसीईआरटी ने किताब के वितरण पर रोक लगा दी है। गलती अनजाने में हुई बताते हुए माफी मांगी गई है। अध्याय को दोबारा लिखा जाएगा और सुधारी गई किताब 2026-27 सत्र में उपलब्ध होगी।
स्कूल शिक्षा विभाग ने भी वितरण रोकने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले की आगे सुनवाई जारी रखी है और एनसीईआरटी को संतोषजनक जवाब देना होगा।



